महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: मदर इकोनॉमी का उदय

भारत में महिलाएं अब केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि वे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेकर देश की आर्थिक स्थिति को सशक्त बना रही हैं। मदर इकोनॉमी के उदय के साथ, महिलाएं फैशन, ऑनलाइन बिक्री, डिजिटल सेवाएं, और स्टार्टअप में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। रोजगार में उनकी भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और सरकारी योजनाएं उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर रही हैं। जानें कैसे महिलाएं अब खुद रोजगार पैदा कर रही हैं और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे रही हैं।
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महिलाओं की आर्थिक भूमिका में बदलाव

भारत आज एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की ओर अग्रसर है। महिलाएं अब केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि वे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेकर देश की आर्थिक स्थिति को सशक्त बना रही हैं। 140 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत में मदर इकोनॉमी एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रही है। महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ फैशन, ऑनलाइन बिक्री, डिजिटल सेवाएं, स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं.


महिलाओं की रोजगार में बढ़ती भागीदारी

पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, 2017-18 में महिलाओं की वर्कर पॉपुलेशन रेशियो 22% थी, जो 2023-24 में बढ़कर 40.3% हो गई है। इसी तरह, महिलाओं की बेरोजगारी दर 2017-18 में 5.6% थी, जो घटकर 2023-24 में 3.2% रह गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में 96% की वृद्धि हुई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 43% रही है.


शिक्षा के साथ रोजगार की संभावनाएं

रिपोर्टों के अनुसार, महिला ग्रेजुएट्स की रोजगार पाने की क्षमता 2013 में 42% थी, जो 2024 में बढ़कर 47.53% हो गई। पोस्टग्रेजुएट और उससे ऊपर की पढ़ाई करने वाली महिलाओं की रोजगार दर 2017-18 के 34.5% से बढ़कर 2023-24 में 40% तक पहुंच गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि महिलाएं अब देश की आर्थिक प्रगति में पहले से अधिक योगदान दे रही हैं.


स्वरोजगार में महिलाओं की बढ़ती संख्या

EPFO के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में 1.56 करोड़ महिलाएं कार्यबल में शामिल हुई हैं। अगस्त 2025 तक eShram पोर्टल पर 16.69 करोड़ से अधिक असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों का पंजीकरण हुआ है। PLFS के अनुसार, महिलाओं के स्वरोजगार में भी बड़ा उछाल आया है, जो 2017-18 में 51.9% था, जो 2023-24 में बढ़कर 67.4% हो गया.


सरकारी योजनाओं का समर्थन

महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं। देशभर में 15 मंत्रालयों की 70 केंद्रीय योजनाएं और 400 से अधिक राज्य स्तरीय योजनाएं महिलाओं को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। पिछले एक दशक में जेंडर बजट में 429% की वृद्धि हुई है, जो FY 2013-14 में 0.85 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY 2025-26 में 4.49 लाख करोड़ रुपये हो गई है.


स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी

DPIIT में रजिस्टर्ड 1.54 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में लगभग 50% में महिला निदेशक हैं। आज लगभग 2 करोड़ महिलाएं लखपति बन चुकी हैं। PM मुद्रा योजना के तहत कुल लोन का 68% महिलाओं को मिला है, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रुपये है.


महिलाएं अब रोजगार देने वाली बन रही हैं

महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों की हिस्सेदारी 2010-11 में 17.4% थी, जो 2023-24 में बढ़कर 26.2% हो गई है। महिला नेतृत्व वाले MSMEs की संख्या लगभग दोगुनी होकर 1 करोड़ से बढ़कर 1.92 करोड़ पहुंच गई है.


हर क्षेत्र में महिलाओं का योगदान

कृषि क्षेत्र: भारत में सबसे अधिक महिलाएं कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और फूड प्रोसेसिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
सर्विस सेक्टर: महिलाएं बैंकिंग, हेल्थकेयर, और IT में बड़ी संख्या में कार्य कर रही हैं।
स्टार्टअप सेक्टर: महिलाएं फिनटेक, एडटेक, और फैशन में तेजी से स्टार्टअप शुरू कर रही हैं।
सरकारी नौकरियां: महिलाएं प्रशासन, सेना, और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.