महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम: पीएम मोदी का संसद में संबोधन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के विशेष सत्र को महिला सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को राष्ट्र की गरिमा से जोड़ा और इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा होगी, जो 2029 से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करेगा। जानें इस महत्वपूर्ण पहल के बारे में और कैसे यह भारतीय राजनीति को बदल सकता है।
| Apr 16, 2026, 09:38 IST
महिलाओं के लिए एक नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र को महिला सशक्तिकरण के लिए एक "ऐतिहासिक कदम" बताया है। सत्र की शुरुआत के साथ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार महिलाओं को राजनीति के मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि महिलाओं का सम्मान और उनकी भागीदारी एक सशक्त राष्ट्र की नींव है।
राष्ट्र की गरिमा और नारी शक्ति: पीएम का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक प्रेरणादायक पोस्ट के माध्यम से देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक जड़ों का उल्लेख करते हुए संस्कृत श्लोक के जरिए इस पहल के महत्व को उजागर किया। उन्होंने कहा, "आज से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में, हमारा देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है, और इसी भावना के साथ हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।"
महिला आरक्षण बिल पर चर्चा
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही देश का सम्मान है, और इसी भावना के साथ, हम इस दिशा में पक्के इरादे से आगे बढ़ रहे हैं।" सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी 16 अप्रैल को महिला आरक्षण संविधान संशोधन बिल पर लोकसभा को संबोधित करेंगे, और उम्मीद है कि वह इस कानून के लिए एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करेंगे। केंद्र ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें ऐसे बदलाव लाए जाएंगे जिनसे 2029 से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित हो सके। यह 2027 के बाद की जनगणना के बाद डिलिमिटेशन से जुड़ी मौजूदा टाइमलाइन को बदल देगा।
क्यों खास है यह संशोधन?
महिला आरक्षण बिल के लागू होने को लेकर पहले संदेह था, क्योंकि इसे जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था। सरकार का यह नया कदम उस तकनीकी बाधा को दूर करने का प्रयास है, ताकि 2029 से देश की आधी आबादी को विधायी निकायों में उनका उचित स्थान मिल सके।
यह विशेष सत्र केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की आधी आबादी को राजनीतिक नेतृत्व सौंपने का एक बड़ा वादा भी है। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन और प्रस्तावित संशोधनों के पारित होने के बाद, भारतीय राजनीति का स्वरूप हमेशा के लिए बदल सकता है।
प्रधानमंत्री का ट्वीट
आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।
— Narendra Modi (@narendramodi) April 16, 2026
व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्।
ता त्वामुषर्वसूयवो… pic.twitter.com/8KWT1WLSje
