महिला आरक्षण विधेयक पर प्रधानमंत्री मोदी का महत्वपूर्ण संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 अप्रैल को विज्ञान भवन में एक महत्वपूर्ण महिला सम्मेलन में भाषण देंगे, जिसमें महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा की जाएगी। यह विधेयक महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन भी प्रस्तावित है। भारतीय जनता पार्टी ने जनसंपर्क प्रयासों को तेज किया है, जिसमें शहरी और ग्रामीण महिलाओं को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री ने इसे महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है।
| Apr 9, 2026, 16:35 IST
महिला सम्मेलन में प्रधानमंत्री का भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 अप्रैल को विज्ञान भवन में एक महत्वपूर्ण महिला सम्मेलन में भाषण देंगे, जो संसद के विशेष सत्र से पहले आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण जनसंपर्क प्रयास माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देंगे। सभी वर्तमान महिला सांसदों को इस सम्मेलन में आमंत्रित किया जा सकता है।
महिला आरक्षण विधेयक का महत्व
विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा की जाएगी, जो विधायी निकायों में महिलाओं की उपस्थिति को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल लैंगिक समानता और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके अलावा, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन 16 अप्रैल को संसद में पेश करने की योजना है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों से संबंधित कानूनों के कार्यान्वयन में सुधार करना है।
महिला संवाद कार्यक्रम
संसद सत्र से पहले, भारतीय जनता पार्टी ने "महिला संवाद" जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनसंपर्क प्रयासों को तेज कर दिया है। इन कार्यक्रमों में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को शामिल किया गया है, ताकि विधेयक के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके और उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त की जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक को महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने और लोकतांत्रिक ढांचे में उनकी भूमिका को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक 'नारी शक्ति' के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और इसका उद्देश्य नीति निर्माण में महिलाओं को सशक्त आवाज देना है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभाओं में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व अधिक समावेशी और संतुलित शासन को बढ़ावा देगा।
