महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में असफलता: मोदी सरकार को मिली पहली हार

महिला आरक्षण बिल का संविधान संशोधन लोकसभा में पास नहीं हो सका, जिससे मोदी सरकार को पहली बार हार का सामना करना पड़ा। 21 घंटे की चर्चा के बाद हुए मतदान में 528 सांसदों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विपक्ष में वोट दिया। बिल को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जो नहीं मिल सका। विपक्ष ने इसे अपनी जीत बताया, जबकि सरकार ने सांसदों से समर्थन की अपील की। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं।
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महिला आरक्षण बिल का संविधान संशोधन

नई दिल्ली। महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन (131वां) बिल को सरकार लोकसभा में पास नहीं करा सकी। इस बिल में संसद की 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।


21 घंटे की चर्चा के बाद इस पर मतदान हुआ। लोकसभा में उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। इस बिल को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जो 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस प्रकार, यह बिल 54 वोटों से गिर गया।


हालांकि, लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने के कारण मौजूदा सांसदों की संख्या 540 है।


सरकार ने दो अन्य बिलों को वोटिंग के लिए पेश नहीं किया। पहला था परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और दूसरा केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026। सरकार ने कहा कि ये बिल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन पर वोटिंग की आवश्यकता नहीं है।


मोदी सरकार के 12 साल के शासन में यह पहला अवसर है जब कोई बिल सदन में पास नहीं हो सका। इससे पहले, अमित शाह ने एक घंटे की स्पीच में कहा था कि यदि ये बिल पास नहीं होते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी।


बिल गिरने के बाद विपक्ष ने इसे अपनी जीत बताया। राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। प्रियंका ने इसे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए बड़ी जीत बताया।


शशि थरूर ने कहा कि हम महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। एमके स्टालिन ने कहा कि 23 अप्रैल को हम दिल्ली के अहंकार को हराएंगे।


सरकार को पता था कि बिल पास नहीं होगा, इसलिए मोदी और शाह ने सांसदों से समर्थन की अपील की। पीएम मोदी ने 13 और 16 अप्रैल को सांसदों से पत्र लिखने और समर्थन देने की अपील की।


अमित शाह ने 17 अप्रैल को कहा कि महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। चुनाव में मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।