महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी का पत्र
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 16 से 18 अप्रैल के बीच होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र भेजकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण कानून) को लागू करने के लिए समर्थन मांगा है। उन्होंने जोर दिया कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए।
कानून में संशोधन की आवश्यकता
2023 में पारित महिला आरक्षण कानून के अनुसार, यह आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू हो सकता था। इस स्थिति में महिलाओं को 2034 से पहले आरक्षण नहीं मिल सकता था। प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में बताया कि सरकार ने विशेषज्ञों की राय के बाद यह निर्णय लिया है कि इसे 2029 के आम चुनाव से लागू किया जाना चाहिए, जिसके लिए कानून में संशोधन आवश्यक है।
संशोधन के प्रभाव
प्रधानमंत्री के अनुसार, इस संशोधन के लागू होने से देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। लोकसभा में सीटों की संख्या 816 तक बढ़ जाएगी, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
महिलाओं की भागीदारी का महत्व
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नीति-निर्धारण और नेतृत्व में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
महिलाओं के लिए ऐतिहासिक क्षण
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि भारत की बेटियां अंतरिक्ष, खेल और सशस्त्र बलों में अपनी क्षमताओं को साबित कर रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में संसद ने इस अधिनियम का समर्थन किया था, जो हमारी लोकतांत्रिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'यह क्षण किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है, यह महिलाओं और हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का समय है।'
विशेष सत्र की शुरुआत
संसद के बजट सत्र की अवधि बढ़ा दी गई है और विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होगा। प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि सभी सांसद इस ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह 140 करोड़ भारतीयों और देश की नारी शक्ति के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
