महाराष्ट्र सरकार ने गिग श्रमिकों के लिए अनिवार्य सत्यापन प्रक्रिया लागू की

महाराष्ट्र सरकार ने अवैध अप्रवासियों के मुद्दे के चलते गिग और डिलीवरी श्रमिकों के लिए एक अनिवार्य सत्यापन प्रक्रिया लागू की है। श्रम मंत्री आकाश फंडकर ने इस आदेश के तहत प्लेटफॉर्मों को श्रमिकों के पहचान पत्रों का सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी है। भाजपा नेता किरित सोमैया के आरोपों के बाद उठाए गए इस कदम ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। विपक्षी नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें समाजवादी पार्टी के अबू आज़मी ने केंद्र सरकार की सीमा सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
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महाराष्ट्र सरकार ने गिग श्रमिकों के लिए अनिवार्य सत्यापन प्रक्रिया लागू की

सत्यापन प्रक्रिया का आदेश

महाराष्ट्र सरकार ने अवैध अप्रवासियों के मुद्दे पर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच, मुंबई और उसके महानगर क्षेत्र में लाखों गिग और डिलीवरी श्रमिकों के लिए एक अनिवार्य सत्यापन प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। श्रम मंत्री आकाश फंडकर ने 7 अप्रैल को गृह विभाग के साथ एक बैठक के बाद यह निर्देश जारी किया। इस आदेश में प्लेटफॉर्मों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि वे श्रमिकों के पहचान पत्रों का सत्यापन करें और इसके लिए पूरी कानूनी जिम्मेदारी लें।


डिलीवरी पार्टनर्स पर प्रभाव

इस आदेश में प्रमुख एग्रीगेटरों जैसे स्विगी, ज़ोमैटो और ब्लिंकइट के डिलीवरी पार्टनर्स शामिल हैं। यह कदम भाजपा नेता किरित सोमैया द्वारा उठाए गए आरोपों के बाद लिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या अप्रवासी जाली दस्तावेजों के माध्यम से डिलीवरी कर्मचारियों में शामिल हो रहे हैं। यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप ले चुका है, खासकर पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनावों से पहले।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी नेताओं ने सोमैया के आरोपों की तीखी आलोचना की है। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी ने उन पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। आज़मी ने कहा कि यदि अवैध घुसपैठ हो रही है, तो यह केंद्र सरकार की सीमा सुरक्षा की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को मुंबई में कम आय वाले श्रमिकों को निशाना बनाने के बजाय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाया जाना चाहिए।