महाराष्ट्र में मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने पर विवाद

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया है, जिसके बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा की सहयोगी पार्टियों ने इस निर्णय की आलोचना की है, यह कहते हुए कि यह गैर-मराठी लोगों के लिए समस्याएँ पैदा कर सकता है। विपक्ष ने इसे तानाशाही आदेश करार दिया है, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।
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महाराष्ट्र में मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने पर विवाद gyanhigyan

मुख्यमंत्री का बयान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को यह सुझाव दिया कि राज्य के नागरिकों को मराठी भाषा सीखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भाषा के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी उस समय आई है जब राज्य सरकार ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य कर दिया है। फडणवीस ने महाराष्ट्र को देश का प्रमुख विकास इंजन और आर्थिक शक्ति केंद्र भी बताया।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

हालांकि, भाजपा सरकार के इस निर्णय ने बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की हैं। भाजपा की सहयोगी पार्टी जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि यह निर्णय स्थानीय निवासियों के लिए सहायक हो सकता है, लेकिन टैक्सी चालकों में बड़ी संख्या में गैर-मराठी लोग भी शामिल हैं, जो वर्षों से वहां रह रहे हैं। उन्हें मराठी सीखने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए।


विपक्ष की आलोचना

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा जानना एक बात है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना दूसरी बात है। यदि सरकार ऐसे नियम लागू करना चाहती है, तो पहले उन्हें क्षेत्रीय भाषा में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करनी चाहिए। इस तरह के प्रतिबंध सद्भाव को बिगाड़ सकते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों ने इस निर्णय की खुलकर आलोचना की है।


भाषाई विवाद

राज्यसभा सांसद और आरजेडी के प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने कहा कि ऐसे तानाशाही आदेश अजीब लगते हैं। भाषाएँ आपस में नहीं लड़तीं; बल्कि जो लोग भाषाओं का उपयोग करके राजनीति करते हैं, वे लड़ते हैं। वास्तव में, भाषाएँ एक-दूसरे को समृद्ध करती हैं। दूसरे राज्यों के टैक्सी चालकों पर किसी विशेष भाषा को थोपना उनके स्वाभाविक संचार को बाधित करता है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का आदेश संघीय ढांचे और संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। ऐसे आदेश केवल क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काते हैं। भाजपा लंबे समय से धर्म और क्षेत्र की राजनीति में लिप्त रही है। भारत के आर्थिक सर्वेक्षण (2016-17) और श्रम बल सर्वेक्षण के अद्यतनों के अनुसार, बिहार और उत्तर प्रदेश देश के 37 प्रतिशत कार्यबल का प्रतिनिधित्व करते हैं।