महाराष्ट्र में मराठी भाषा की अनिवार्यता पर मुख्यमंत्री का स्पष्ट बयान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में केवल मराठी भाषा को अनिवार्य माना जाएगा। उन्होंने नागरिकों को आश्वासन दिया कि किसी अन्य भाषा को थोपने का कोई प्रयास नहीं किया जाएगा। यह बयान भाषा नीति और सांस्कृतिक पहचान पर चल रही चर्चाओं के बीच आया है। मुख्यमंत्री ने मराठी के संरक्षण और संवर्धन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया।
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महाराष्ट्र में मराठी भाषा की अनिवार्यता पर मुख्यमंत्री का स्पष्ट बयान

मुख्यमंत्री का बयान

भाषा, पहचान और शासन के मुद्दों पर चल रही चर्चाओं के बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोहराया है कि राज्य में केवल मराठी भाषा को अनिवार्य माना जाएगा। उन्होंने नागरिकों को आश्वासन दिया कि किसी अन्य भाषा को थोपने का कोई प्रयास नहीं किया जाएगा।


मराठी की अनिवार्यता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में केवल मराठी भाषा ही अनिवार्य रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का किसी अन्य भाषा को थोपने का कोई इरादा नहीं है। यह बयान भाषा नीति, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान पर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच आया है। जबकि सरकार इसे मराठी गौरव को बनाए रखने और भाषाई विविधता का सम्मान करने के रूप में पेश कर रही है, विपक्षी दल और नागरिक समाज समूह इस पर बहस कर रहे हैं कि ये नीतियां अल्पसंख्यकों और सामाजिक सद्भाव पर क्या प्रभाव डाल सकती हैं।


अन्य भाषाओं का भविष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की स्कूली शिक्षा में केवल मराठी को अनिवार्य किया जाएगा। अन्य भारतीय भाषाओं को अनिवार्य नहीं किया जाएगा। यह तय करने के लिए कि अन्य भाषाएं किस कक्षा से पढ़ाई जाएंगी, डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। यह जानकारी उन्होंने 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन पर दी।


मराठी का संरक्षण

मुख्यमंत्री ने मराठी साहित्य और संस्कृति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने 'राज्यव्यवहार कोश' के माध्यम से मराठी को प्रशासनिक भाषा का दर्जा दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार मराठी के संरक्षण और संवर्धन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिए जाने को गर्व की बात बताया। इसके साथ ही, उन्होंने मराठी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और इसे रोजमर्रा के जीवन में मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।