महाराष्ट्र में गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी पर अमृता फडणवीस का बयान
महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया पर विवाद
महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस संदर्भ में अमृता फडणवीस ने कहा कि त्योहारों में किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयोजनों में सुरक्षा के लिए पहचान पत्र की जांच की जा सकती है, लेकिन धर्म के आधार पर किसी को रोकना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर अमृता का बयान
अमृता फडणवीस ने अपनी सार्वजनिक भूमिका और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के विषय में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मंत्रियों की पत्नियों को अक्सर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है और कई बार उन्हें नकारात्मक छवि में प्रस्तुत किया जाता है।
गरबा में मुस्लिमों की भागीदारी पर विचार
अमृता ने कहा कि गरबा और नवरात्रि जैसे त्योहारों का उद्देश्य लोगों को एक साथ लाना है। उनका मानना है कि यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति शांति से गरबा में भाग लेता है और उत्सव का आनंद उठाता है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है।
VHP और नितेश राणे की अलग राय
यह बयान उस समय आया है जब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने भी इस मांग का समर्थन किया है, जिससे अमृता फडणवीस की राय इस मुद्दे पर अलग नजर आ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई वास्तविक समस्या है, तो उसके समाधान के लिए उचित नियम और कानूनी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, न कि धर्म के आधार पर भेदभाव किया जाए।
