महाराष्ट्र में अशोक खरात कांड: अंधविश्वास और यौन शोषण का भंडाफोड़
अशोक खरात कांड का खुलासा
महाराष्ट्र के नासिक में अशोक खरात का मामला देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। यह व्यक्ति, जो खुद को एक धर्मगुरु और अंक ज्योतिषी बताता था, गंभीर यौन शोषण, ठगी और काले जादू के आरोपों में फंस गया है। उसकी गिरफ्तारी 18 मार्च को हुई थी, और जांच के दौरान उसके नेटवर्क की कई परतें खुल रही हैं।
अशोक खरात की पहचान
अशोक खरात पहले मर्चेंट नेवी में कार्यरत था और लोग उसे कैप्टन के नाम से जानते थे। सेवानिवृत्ति के बाद, उसने अंक गणना और तंत्र-मंत्र का ज्ञान हासिल कर एक नई पहचान बनाई। नासिक के मिरगांव में उसने शिवनिका संस्थान और ईशान्येश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की। धीरे-धीरे उसने अपनी छवि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बनाई जो लोगों की शादी, संतान और पारिवारिक समस्याओं का समाधान कर सकता है।
जांच में सामने आए तथ्य
जांच में यह भी पता चला है कि खरात लोगों के मन में डर और अंधविश्वास पैदा करता था। उसने मंदिर में नकली सांप और जंगली जानवर रखकर एक रहस्यमय माहौल बनाया। कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें धमकाया जाता था कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया तो उनके परिवार को नुकसान होगा।
यौन शोषण के आरोप
पुलिस को एक पेन ड्राइव मिली जिसमें 58 अश्लील वीडियो क्लिप थे। विशेष जांच टीम को 100 से अधिक संदिग्ध वीडियो के संकेत मिले हैं। आरोप है कि खरात अपने ऑफिस में लगे कैमरों के जरिए महिलाओं के वीडियो रिकॉर्ड करता था और बाद में उन्हें ब्लैकमेल करता था।
स्टिंग ऑपरेशन का खुलासा
एक कर्मचारी ने अपनी गर्भवती पत्नी के साथ हुई घटना के बाद स्टिंग ऑपरेशन किया, जिससे खरात की करतूतें सामने आईं। 21 मार्च को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने यौन शोषण, धोखाधड़ी और काले जादू विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया।
अंधविश्वास का भयावह पहलू
खरात कथित तौर पर 'योनि शुद्धिकरण' जैसे झूठे अनुष्ठानों का सहारा लेकर महिलाओं का शोषण करता था। वह महिलाओं को अकेले कमरे में बुलाकर उनके साथ दुराचार करता था। कई पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें मानसिक रूप से भ्रमित किया जाता था।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह खरात के पैर धोती दिखीं। उन्होंने 20 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी।
स्थानीय लोगों की चिंता
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मिरगांव में लोग इस मामले पर खुलकर बात करने से डरते हैं। कई लोगों ने कहा कि अगर खरात जेल से बाहर आया तो वह उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
पुलिस की कार्रवाई
जांच के दौरान पुलिस को एक रिवॉल्वर और कई कारतूस मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि इनका उपयोग मानव बलि जैसे कृत्यों में हुआ हो सकता है।
अंधविश्वास विरोधी कानून की स्थिति
इस मामले ने महाराष्ट्र में अंधविश्वास विरोधी कानून के कमजोर क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून तो है, लेकिन उसका पालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा।
भविष्य की संभावनाएं
अशोक खरात का मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस खतरनाक मानसिकता को उजागर करता है जहां अंधविश्वास और डर का गठजोड़ समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाता है।
