महाराष्ट्र में NEET परीक्षा के बाद छात्रा की आत्महत्या से बढ़ी चिंता

महाराष्ट्र के जालालपुर गांव में एक छात्रा ने NEET परीक्षा में कम अंक मिलने के बाद आत्महत्या कर ली, जिससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता बढ़ गई है। परिवार के अनुसार, अंकिता सांगले ने 166 अंक प्राप्त किए थे, लेकिन वह उच्च अंक की उम्मीद कर रही थी। इस घटना ने परीक्षा के दौरान छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिस्पर्धा, माता-पिता की अपेक्षाएं और परीक्षा के परिणामों का तनाव छात्रों के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर रहा है।
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जालालपुर गांव में दुखद घटना

प्रतिनिधि चित्र

नई दिल्ली, 27 जुलाई: महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के करजत तालुका के जालालपुर गांव से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक छात्रा ने NEET परीक्षा में अपेक्षाकृत कम अंक मिलने के बाद आत्महत्या कर ली।

मृतक छात्रा का नाम अंकिता सांगले है। परिवार के सदस्यों के अनुसार, अंकिता ने NEET परीक्षा में 166 अंक प्राप्त किए थे, लेकिन वह उच्च अंक की उम्मीद कर रही थी, जिससे वह तनाव में थी।

यह घटना शनिवार शाम लगभग 4:30 बजे उसके निवास पर हुई। परिवार के सदस्यों ने बताया कि सांगले को पढ़ाई के लिए एक अलग कमरा दिया गया था, जहां वह नियमित रूप से अपनी परीक्षाओं की तैयारी करती थी।

जब लंबे समय तक कमरे से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो परिवार के सदस्यों ने दरवाजा खोला और उसे बेहोश पाया। उन्होंने तुरंत पुलिस को इस घटना की सूचना दी।

परिवार के एक सदस्य द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की और मामले की आगे की जांच शुरू की।

यह घटना उन बढ़ते चिंताओं को उजागर करती है जो छात्रों के बीच उच्च प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के लिए तैयारी के दौरान मानसिक दबाव को लेकर हैं। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बार-बार छात्रों और परिवारों से आग्रह किया है कि वे तनाव के समय में सहायता प्राप्त करें और परीक्षा के परिणामों को अपनी भलाई पर प्रभाव डालने न दें।

पुलिस वर्तमान में इस घटना के संदर्भ में जांच कर रही है।

मीडिया की जांचों ने NEET से संबंधित छात्र आत्महत्याओं में चिंताजनक वृद्धि को उजागर किया है, जिसमें 2025 में मामलों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। विशेषज्ञों ने इस संकट के लिए कई कारकों को जिम्मेदार ठहराया है, जिसमें तीव्र प्रतिस्पर्धा, शैक्षणिक दबाव, माता-पिता की अपेक्षाएं और उच्च-दांव प्रवेश परीक्षाओं से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्या शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, NEET-UG की रद्दीकरण और पेपर लीक के आरोपों के बाद पुनः परीक्षा प्रक्रिया ने उम्मीदवारों के बीच चिंता और अनिश्चितता को बढ़ा दिया। परीक्षा के कार्यक्रम में व्यवधान, साथ ही चिकित्सा प्रवेश प्राप्त करने के दबाव ने कई छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ा दिया। रिपोर्टों में बताया गया है कि पुनः परीक्षा अवधि के आसपास एक दर्जन से अधिक उम्मीदवारों की आत्महत्याएं दर्ज की गईं।