महाराष्ट्र के किसानों ने प्याज के न्यूनतम मूल्य की मांग की

महाराष्ट्र के किसान केंद्र सरकार द्वारा प्याज खरीद के मानकों में दी गई ढील का स्वागत करते हैं, लेकिन वे न्यूनतम खरीद मूल्य 3000 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि मौजूदा खरीद दर उनकी लागत को भी कवर नहीं कर रही है। सरकार ने आकार और गुणवत्ता संबंधी मानकों में ढील दी है, लेकिन किसान अभी भी घाटे में हैं। इसके अलावा, उन्होंने पिछले 45 महीनों में कम कीमत पर प्याज बेचने वाले किसानों के लिए 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी की भी मांग की है।
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महाराष्ट्र के किसानों ने प्याज के न्यूनतम मूल्य की मांग की gyanhigyan

किसानों की प्याज खरीद पर प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र के किसान केंद्र सरकार द्वारा प्याज खरीद के मानकों में दी गई ढील का स्वागत करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि इससे उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं होगा। किसानों ने सरकार से अनुरोध किया है कि प्याज का न्यूनतम खरीद मूल्य 3000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए। उनका कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ द्वारा लगभग 1,580 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही खरीद उनकी लागत को भी कवर नहीं कर पा रही है।


सरकार द्वारा मानकों में ढील

केंद्र सरकार ने प्याज खरीद के लिए आकार और गुणवत्ता संबंधी मानकों में ढील दी है। अब स्वीकार्य आकार सीमा को 4565 मिमी से बढ़ाकर 3570 मिमी कर दिया गया है। इसके साथ ही रंग, छिलके की खामियों और हल्की धूप से हुई क्षति जैसी गुणवत्ता संबंधी शर्तों को भी सरल बनाया गया है। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि असली समस्या खरीद मानकों की नहीं, बल्कि कम कीमतों की है।


किसान अभी भी घाटे में

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाने ने कहा कि भले ही नियमों में ढील दी गई है, लेकिन किसान अभी भी घाटे में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्याज के दाम कब बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि पहले की ग्रेडिंग व्यवस्था में यदि कोई किसान 30 क्विंटल प्याज लाता था, तो उसमें से केवल लगभग 25 क्विंटल ही स्वीकार किए जाते थे, और बाकी प्याज उसे कम कीमत पर बेचना पड़ता था।


किसानों की सब्सिडी की मांग

संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्याज उत्पादन की औसत लागत लगभग 1,800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि किसानों को इससे कम कीमत पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनके अनुसार, उत्पादन लागत से कम दाम मिलने के कारण किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं। इसके अलावा, किसानों ने पिछले 45 महीनों में कम कीमत पर प्याज बेचने वाले किसानों को 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी देने की भी मांग की है।