महाभारत में दुर्योधन की तीन बड़ी गलतियाँ
महाभारत की कहानी
महाभारत की कथा: बचपन से हम महाभारत की कहानियों से परिचित हैं। दुर्योधन एक घमंडी और अधर्मी व्यक्ति था, जिसका स्वभाव महाभारत युद्ध का मुख्य कारण बना। इस युद्ध ने कौरवों के वंश का अंत कर दिया, जहाँ भाई-भाई के खिलाफ खड़े हो गए। दुर्योधन की मृत्यु युद्ध के अंत में हुई, जिसे भीम ने समाप्त किया। इस युद्ध में भगवान श्री कृष्ण की महत्वपूर्ण भूमिका थी। दुर्योधन ने अपनी मृत्यु के समय श्री कृष्ण को तीन उंगलियाँ बार-बार दिखाई।
दुर्योधन के उंगलियाँ दिखाने का क्या अर्थ था? जब श्री कृष्ण उनके पास गए, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने तीन गलतियाँ की, जिनके कारण उन्हें युद्ध में हार का सामना करना पड़ा। आइए जानते हैं वे गलतियाँ क्या थीं।
पहली गलती
पहली गलती के बारे में जानिए
दुर्योधन की पहली गलती यह थी कि उसने भगवान श्री कृष्ण को युद्ध में शामिल नहीं किया। उसने उनकी नारायणी सेना की मांग की। मरते समय, दुर्योधन ने श्री कृष्ण से कहा कि अगर उसने नारायणी सेना की बजाय उन्हें चुना होता, तो वह आज इस स्थिति में नहीं होता और युद्ध जीत जाता।
दूसरी गलती
दूसरी गलती क्या थी?
दुर्योधन के पिता धृतराष्ट्र अंधे थे, इसलिए उनकी माता गांधारी ने भी अपनी आँखों पर पट्टी बांध ली थी। भीम से युद्ध से पहले, दुर्योधन की माता ने उन्हें निर्वस्त्र होकर आने को कहा। जब वह निर्वस्त्र होकर अपनी माता के पास जाने लगे, तो श्री कृष्ण ने उन्हें रोका और कहा कि इस अवस्था में माँ के पास जाना उचित नहीं है। श्री कृष्ण ने पत्तों से बनी लंगोट पहनकर अपनी माता के पास गए। जब वह वहाँ पहुँचे, तो गांधारी ने अपनी आँखों की पट्टी खोल दी, जिससे दुर्योधन का शरीर वज्र के समान हो गया। इसी स्थान पर भीम ने गदा से दुर्योधन का वध किया। दुर्योधन ने श्री कृष्ण से कहा कि यदि वह निर्वस्त्र होकर जाते, तो कोई उन्हें नहीं मार पाता।
तीसरी गलती
तीसरी गलती क्या थी?
दुर्योधन ने अपनी तीसरी गलती बताई कि वह युद्ध में सबसे अंत में शामिल हुआ। यदि वह शुरुआत में आता, तो परिणाम अलग होता। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि ये तीन गलतियाँ तुम्हारी हार का कारण नहीं हैं, बल्कि तुम्हारा अधर्म और अहंकार ही इस युद्ध में हार का मुख्य कारण है।
