महबूबा मुफ्ती ने सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर उठाए सवाल

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू और कश्मीर में पांच सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर सवाल उठाते हुए इसे अन्यायपूर्ण और मनमाना बताया। उन्होंने कहा कि हर बर्खास्तगी के पीछे एक परिवार होता है, जो अंधकार में धकेल दिया जाता है। मुफ्ती ने आरोप लगाया कि भारत सरकार की कठोर नीतियां कानून के शासन का मजाक उड़ाती हैं। इस मामले में बर्खास्त कर्मचारियों में एक शिक्षक, एक तकनीशियन और एक ड्राइवर शामिल हैं, जिन पर आतंकवादी संगठनों से संबंध रखने का आरोप है।
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महबूबा मुफ्ती ने सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर उठाए सवाल

महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया

जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री तथा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा पांच सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के निर्णय की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे मनमाना और अन्यायपूर्ण करार दिया। मुफ्ती ने X पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में इस तरह की कार्रवाइयां खतरनाक रूप से सामान्य हो गई हैं।


बर्खास्तगी का प्रभाव

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं है, बल्कि हर बर्खास्तगी के पीछे एक परिवार होता है, जिसे अंधकार में धकेल दिया जाता है। यह एक प्रकार की सामूहिक सजा है, जिसके कारण पूरे परिवार रातोंरात बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार की कठोर नीतियां कानून के शासन का मजाक उड़ाती हैं और उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करतीं। उनके ये बयान उपराज्यपाल द्वारा प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से संबंध रखने के आरोप में पांच कर्मचारियों की बर्खास्तगी के एक दिन बाद आए।


बर्खास्त कर्मचारियों की जानकारी

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में एक सरकारी स्कूल शिक्षक, एक प्रयोगशाला तकनीशियन, एक सहायक लाइनमैन, वन विभाग का एक कर्मचारी और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत एक ड्राइवर शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्राइवर, जो वर्तमान में श्रीनगर की केंद्रीय जेल में बंद है, को हिजबुल मुजाहिदीन के एक सूचीबद्ध ओवरग्राउंड वर्कर के रूप में पहचाना गया है। उस पर आरोप है कि वह पाकिस्तान स्थित एक हैंडलर के साथ लगातार संपर्क में था। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में की गई है।