महबूबा मुफ्ती ने खामेनेई की मौत पर महिलाओं की रिहाई की मांग की
महबूबा मुफ्ती का बयान
महबूबा मुफ्ती, जो पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष हैं, ने सोमवार को जम्मू कश्मीर के पुलिस प्रमुख नलिन प्रभात से अनुरोध किया कि वे अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के विरोध में कश्मीर घाटी में हिरासत में ली गई महिलाओं को रिहा करने का आदेश दें। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील स्थिति को करुणा के साथ संभालना चाहिए, क्योंकि यह हमारे लिए शोक का समय है। खामेनेई की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों में कम से कम 14 लोग घायल हुए, जिनमें छह सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
महबूबा मुफ्ती का सोशल मीडिया पोस्ट
महबूबा मुफ्ती ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत पर एकजुटता व्यक्त करने के लिए कश्मीर में महिला प्रदर्शनकारियों की हिरासत की चिंताजनक खबरें आई हैं। मैं जम्मू कश्मीर के डीजीपी से उनकी तत्काल रिहाई का आदेश देने का आग्रह करती हूं।"
महबूबा मुफ्ती और खामेनेई का संबंध
महबूबा मुफ्ती और अयातुल्ला खामेनेई के बीच का संबंध धार्मिक सहानुभूति और क्षेत्रीय राजनीति पर आधारित है। कश्मीर में एक महत्वपूर्ण शिया समुदाय है, जो खामेनेई को अपना आध्यात्मिक नेता मानता है। मुफ्ती का उनके प्रति समर्थन स्थानीय भावनाओं से जुड़ने का प्रयास है। खामेनेई की 'शहादत' पर दुख व्यक्त करना और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग करना, उनके अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक मुद्दों के प्रति झुकाव को दर्शाता है।
भारत में खामेनेई की मौत का मातम
ईरान में खामेनेई की मौत का भारत, विशेषकर कश्मीर और लखनऊ जैसे क्षेत्रों में मातम मनाने का मुख्य कारण धार्मिक जुड़ाव है। शिया मुसलमान उन्हें केवल ईरान का नेता नहीं, बल्कि विश्व के शिया समुदाय का 'वली-ए-फकीह' मानते हैं। उनकी मृत्यु उनके अनुयायियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसके कारण भारत के कई हिस्सों में लोग सड़कों पर उतरकर शोक जता रहे हैं और अमेरिका-इजराइल के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
