महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर भर्ती के गंभीर आरोप लगाए

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले दरवाजे से 25,000 लोगों की भर्ती की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस प्रक्रिया में निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया और उम्मीदवारों से पैसे लिए गए। महबूबा ने इन नियुक्तियों को तुरंत बंद करने की मांग की है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और कश्मीरी पंडितों की वापसी पर उनके विचार।
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पीडीपी प्रमुख का आरोप

जम्मू-कश्मीर में विपक्षी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने उमर अब्दुल्ला की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महबूबा मुफ्ती, जो पार्टी की प्रमुख हैं, ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार ने पिछले दरवाजे से 25,000 लोगों की भर्ती की है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "नेकां के 25 महीनों के कार्यकाल में यह भर्ती की गई। मेरे पास इसके आदेश हैं, लेकिन मैं इनकी पहचान उजागर नहीं करना चाहती ताकि उनकी सुरक्षा बनी रहे।"


महबूबा ने आगे कहा, "ये सामान्य पद नहीं थे, बल्कि जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पद थे, जिन्हें मंत्रियों, विधायकों और गठबंधन सहयोगियों को दिया गया। मुझे लगता है कि भाजपा भी इसमें शामिल है, इसलिए वे इस मुद्दे पर चुप हैं।"


भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पीडीपी को इन नियुक्तियों के संबंध में कई शिकायतें मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उम्मीदवारों से दो से तीन लाख रुपये लिए। महबूबा ने कहा, "इस प्रक्रिया में लगभग 200 निजी 'आउटसोर्सिंग एजेंसियों' का इस्तेमाल किया गया। एक वेबसाइट कुछ समय के लिए खुली रही, जहां उम्मीदवारों से आवेदन मांगे गए, लेकिन जैसे ही आवेदन जमा होते थे, वेबसाइट बंद हो जाती थी।"


उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अपनी सूची आउटसोर्सिंग एजेंसियों को दी, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया को पूरा किया। महबूबा ने कहा, "कुछ लोग जैसे रमजान साहब और आयुष साहब हैं, जिनके पदों का मैं खुलासा नहीं करना चाहती। कई विभागों में ऐसे और भी लोग हैं, जो विधायकों से सूची लेते थे और फिर उसे आउटसोर्सिंग एजेंसियों को दे देते थे।"


भर्ती पर रोक लगाने की मांग

महबूबा ने आरोप लगाया कि ये नियुक्तियां बिना किसी विज्ञापन के की गईं और उन्होंने तुरंत इन नियुक्तियों को बंद करने की मांग की।


कश्मीरी पंडितों की वापसी के मुद्दे पर महबूबा ने कहा कि कुछ 'लॉबी' समुदाय की पीड़ा को अपने एजेंडे के लिए 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा, "कश्मीरी पंडितों को अतीत के बारे में सोचना बंद कर भविष्य की ओर देखना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में मारे गए लोगों में से लगभग 99 प्रतिशत मुसलमान हैं, जबकि केवल एक प्रतिशत हमारे पंडित भाई थे।"