ममता बनर्जी को एक और झटका: कोएल मल्लिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को एक और राजनीतिक झटका लगा है, जब अभिनेत्री से नेता बनीं कोएल मल्लिक ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले, तीन अन्य सांसदों ने भाजपा में शामिल होने के लिए अपने पदों से इस्तीफा दिया था। इस घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या घटकर 9 रह गई है। जानें इस इस्तीफे के पीछे की वजह और भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की स्थिति के बारे में।
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राजनीतिक संकट में तृणमूल कांग्रेस

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी को गुरुवार को एक और बड़ा झटका लगा, जब अभिनेत्री से नेता बनीं रुक्मिणी मल्लिक, जिन्हें पेशेवर रूप से कोएल मल्लिक के नाम से जाना जाता है, ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले, तृणमूल के तीन सांसदों ने भाजपा में शामिल होने के लिए अपनी राज्यसभा सीटों से इस्तीफा दिया था। कोएल मल्लिक का इस्तीफा उस समय आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है।


कोएल मल्लिक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या घटकर 9 रह गई है। इससे पहले भाजपा के तीन उम्मीदवारों सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने सोमवार को पश्चिम बंगाल से राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। इन सीटों के लिए मतदान 24 जुलाई को होगा। अधिकारियों के अनुसार, तीनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपने नामांकन पत्र जमा किए। नामांकन दाखिल करने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के साथ विधानसभा स्थित अपने कक्ष में तीनों उम्मीदवारों के साथ बैठक की।


ये तीनों राज्यसभा सीटें सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने और तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के बाद रिक्त हुई थीं। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। अब वे करीब एक महीने बाद भाजपा के टिकट पर दोबारा संसद पहुंचने के लिए तैयार हैं। तीनों नेता नौ जुलाई को भाजपा में शामिल हुए थे और कुछ ही घंटों के भीतर पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद यह पहला बड़ा अवसर है, जब तृणमूल के पूर्व नेताओं को पार्टी में शामिल किया गया है।


इसे इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को भाजपा में शामिल करने पर लगी अनौपचारिक रोक उन नेताओं पर लागू नहीं होगी, जिन्हें पार्टी राजनीतिक रूप से विश्वसनीय और भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त मानती है। नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सुष्मिता देव ने उन पर भरोसा जताने के लिए भाजपा नेतृत्व और पार्टी के विधायकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भाजपा में उन्हें ‘परिवार जैसा’ अपनापन मिला है। उन्होंने बताया कि शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें राज्यसभा में सक्रिय रूप से बहसों में भाग लेने और पार्टी के विधायकों के साथ समन्वय बनाकर काम करने की सलाह दी है। देव ने कहा कि उनका जन्म भले ही असम के सिलचर में हुआ हो, लेकिन वह पश्चिम बंगाल के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।