ममता बनर्जी का विरोध मार्च: ईडी की कार्रवाई पर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में ईडी की कार्रवाई के खिलाफ एक विरोध मार्च का आयोजन किया। इस दौरान, उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला किया और सांसदों की गिरफ्तारी को लोकतंत्र के खिलाफ बताया। जस्टिस शुभ्रा घोष की बेंच में सुनवाई के समय वकीलों और इंटर्न की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ममता ने अपने सांसदों के साथ किए गए व्यवहार की कड़ी निंदा की और इसे वर्दी में अहंकार का प्रतीक बताया। जानें इस घटनाक्रम के सभी पहलुओं के बारे में।
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ममता बनर्जी का विरोध मार्च: ईडी की कार्रवाई पर उठे सवाल

ममता बनर्जी का नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में आई-पीएसी प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालयों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई तलाशी के खिलाफ एक विरोध मार्च का आयोजन किया। टीएमसी सांसदों की गिरफ्तारी के बाद, ममता ने भाजपा पर तीखा हमला किया।


दोपहर करीब 2:30 बजे, जब जस्टिस शुभ्रा घोष की बेंच में सुनवाई शुरू होने वाली थी, वहां वकीलों और इंटर्न की एक बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि पैर रखने की भी जगह नहीं बची। जस्टिस घोष ने भीड़ को देखते हुए वकीलों और इंटर्न को बाहर जाने के लिए कहा, जो इस मामले से संबंधित नहीं थे। उन्होंने 5 मिनट का समय दिया और चेतावनी दी कि यदि भीड़ कम नहीं हुई, तो वह सुनवाई नहीं करेंगी।


केंद्रीय गृह मंत्री के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

इससे पहले, आईपीएसी प्रमुख प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित आवास पर ईडी की छापेमारी के विरोध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर टीएमसी सांसदों महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ'ब्रायन और अन्य का प्रदर्शन हुआ। इन सांसदों की गिरफ्तारी के बाद, ममता बनर्जी ने केंद्र और भाजपा पर तीखा हमला किया।


उन्होंने कहा कि सांसदों के साथ किया गया व्यवहार वर्दी में अहंकार का प्रतीक था। ममता ने एक्स पर लिखा कि वह अपने सांसदों के साथ किए गए शर्मनाक और अस्वीकार्य व्यवहार की कड़ी निंदा करती हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए सड़कों पर घसीटना कानून प्रवर्तन नहीं, बल्कि वर्दी में अहंकार है। यह लोकतंत्र है, भाजपा की निजी संपत्ति नहीं।