मनोज तिवारी ने TMC और ममता बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप

पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस से अपने संबंधों को समाप्त करने की घोषणा की है। उन्होंने पार्टी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिसमें टिकट के लिए पैसे की मांग शामिल है। तिवारी ने कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है और विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न की जा रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत और ममता बनर्जी की हार ने राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। जानें इस मामले में और क्या कहा तिवारी ने।
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मनोज तिवारी ने TMC और ममता बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप gyanhigyan

मनोज तिवारी का तृणमूल कांग्रेस से अलविदा

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के विधायक मनोज तिवारी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उनके लिए तृणमूल कांग्रेस का अध्याय समाप्त हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने उन्हें हावड़ा की शिबपुर सीट से टिकट देने से इनकार किया क्योंकि उन्होंने पांच करोड़ रुपये की मांग को ठुकरा दिया।


भ्रष्टाचार के आरोप

मनोज तिवारी, जो ममता बनर्जी के नेतृत्व में खेल राज्य मंत्री रह चुके हैं, ने हाल ही में विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में टिकट पाने के लिए पैसे की मांग की गई थी।


टिकट के लिए पैसे की मांग

तिवारी ने एक इंटरव्यू में कहा, "इस हार से मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। जब पार्टी में भ्रष्टाचार हो और विकास की कोई संभावना न हो, तो ऐसा होना स्वाभाविक है।" उन्होंने बताया कि कम से कम 70 से 72 उम्मीदवारों ने टिकट के लिए पांच करोड़ रुपये दिए, जबकि उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया।


टीएमसी में लोकतंत्र की कमी

मनोज तिवारी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है। उन्होंने कहा, "मैंने ऐसी बैठकों में भाग लिया है जहां सभी मंत्रियों को बुलाया जाता था, लेकिन मुझे केवल एक 'लॉलीपॉप' दिया गया था।"


विकास कार्यों में बाधा

तिवारी ने कहा कि हावड़ा जिले में सीवेज और ड्रेनेज प्रणाली की समस्याओं को हल करने में उनकी कोशिशों के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई। उन्होंने कहा, "मैंने अपने विधायक कोष से भी पैसे खर्च किए, लेकिन विकास कार्यों में बाधा डालने वाले लोग कभी भी सक्रिय नहीं रहे।"


ममता बनर्जी का इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी को केवल 80 सीटें मिलीं। ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से भी हार का सामना किया, लेकिन उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।