मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 पेश, विपक्ष ने किया हंगामा

मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 पेश किया, जिसमें बहुविवाह पर रोक और विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री से जुड़े भूमि सौदों को लेकर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए जल्दबाजी कर रही है। विधेयक में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव है, जिसमें तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाना शामिल है।
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समान नागरिक संहिता विधेयक का प्रस्तुतीकरण

मध्यप्रदेश की सरकार ने सोमवार को विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 को सदन में पेश किया। इस प्रस्तावित कानून में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और सभी धर्मों के लिए विवाह एवं तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है। हालांकि, विधेयक के पेश होने से पहले विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े कथित भूमि सौदों को लेकर सदन में हंगामा किया और चर्चा की मांग की।


विपक्ष का हंगामा और स्थगन प्रस्ताव

विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से मुख्यमंत्री और उनके परिवार द्वारा कथित रूप से बड़े पैमाने पर की गई भूमि खरीद का मामला उठाया। कांग्रेस ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उज्जैन और सिंहस्थ क्षेत्र में हुए इन सौदों की जांच की मांग की। सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह मामला पुराना है और इसे स्थगन प्रस्ताव के तहत नहीं लिया जा सकता।


सदन की कार्यवाही में व्यवधान

विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही को 30 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। बाद में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्थगन प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह विषय तत्काल महत्व का नहीं है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि स्थगन प्रस्ताव आमतौर पर वर्तमान घटनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के लिए होता है। इसके विरोध में कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया।


यूसीसी विधेयक पर कांग्रेस की आपत्ति

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए यूसीसी विधेयक लाने में जल्दबाजी कर रही है, जबकि ओबीसी और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर पूरी तरह मौन है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि यूसीसी विधेयक को कार्यसूची में शामिल किए बिना ही पेश कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि इस विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा कराई जाएगी।


यूसीसी विधेयक-2026 के महत्वपूर्ण प्रावधान

प्रस्तावित यूसीसी विधेयक-2026 के मसौदे में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसमें तीन तलाक और निकाह हलाला को दंडनीय अपराध बनाने, बहुविवाह पर रोक लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप का एक महीने के भीतर पंजीकरण न कराने पर तीन महीने की कैद का प्रावधान है। विधेयक में सरोगेसी, गोद लिए गए और सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) से जन्मे बच्चों को भी समान कानूनी और उत्तराधिकार अधिकार देने का प्रस्ताव है, हालांकि अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।