मध्यप्रदेश में मुस्लिम समुदाय ने भोजशाला परिसर में नमाज अदा की
भोजशाला परिसर में नमाज का आयोजन
उच्चतम न्यायालय की अनुमति मिलने के एक दिन बाद, धार जिले के भोजशाला-कमाल मौला परिसर के निकट शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय ने कड़ी पुलिस सुरक्षा में नमाज अदा की। जिला प्रशासन ने बताया कि मुस्लिम प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद सर्वे नंबर 612 को नमाज के लिए चुना गया। यह पहली बार था जब मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा मई में भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किए जाने के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जुमे की नमाज के लिए एकत्र हुए।
उच्चतम न्यायालय का निर्देश
बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम समुदाय को विवादित भोजशाला परिसर के निकट दरगाह परिसर में शुक्रवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए। अदालत के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने नमाज के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। अधिकारियों ने बताया कि दोपहर करीब ढाई बजे 150 से अधिक लोग नमाज के लिए पहुंचे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बारिश के बावजूद, समुदाय के लोग निर्धारित स्थल पर नमाज अदा करने पहुंचे। नमाज से पहले जिला प्रशासन और मुस्लिम प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। सुरक्षा के मद्देनजर भोजशाला परिसर के चारों ओर अवरोधक लगाए गए और परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
मुस्लिम प्रतिनिधियों की मांग
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी के सदस्य अब्दुल समद ने कहा कि उन्होंने अपनी मांगें उच्चतम न्यायालय के समक्ष रखीं। अदालत ने गंभीरता से सुनवाई करते हुए नमाज अदा करने का आदेश दिया। उन्होंने बताया कि अदालत ने सर्वे नंबर 611, 612 और 596 का उल्लेख किया और उपलब्ध स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने को कहा।
शांतिपूर्ण नमाज का आयोजन
समद ने कहा कि प्रशासन के सहयोग से उन्होंने सर्वे नंबर 612 पर नमाज अदा की और सर्वे नंबर 611 को छोड़ दिया, ताकि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम से ही मुस्लिम समुदाय के साथ संवाद किया गया। प्रशासन और पुलिस विभाग ने आपसी सहमति से आज शांतिपूर्ण ढंग से नमाज कराने का निर्णय लिया।
पुलिस की तैनाती
नमाज के दौरान लगभग 800 से 900 पुलिसकर्मी तैनात किए गए, जिनमें विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के जवान भी शामिल थे। शहर के संवेदनशील इलाकों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीसीटीवी के जरिए निगरानी की गई।
प्रशासन की व्यवस्थाएं
उपखंड अधिकारी (एसडीएम) राजकुमार हलधर ने कहा कि प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं के बीच करीब 150 लोगों ने सर्वे नंबर 612 पर शांतिपूर्वक नमाज अदा की। इससे पहले धार के जिलाधिकारी राजीव रंजन मीणा ने बताया था कि नमाज के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं की गई हैं।
उच्च न्यायालय का निर्णय
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने मई में अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना था और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वर्ष 2003 के आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी।
नमाज के लिए स्थान का चयन
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने 242 पन्नों के फैसले में कहा था कि 11वीं शताब्दी के इस स्मारक का धार्मिक स्वरूप वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर स्थापित हो चुका है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद निर्माण के लिए जिले में अलग भूमि आवंटित करने का अनुरोध राज्य सरकार से कर सकता है। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया, जिसने बृहस्पतिवार को विवादित परिसर से सटे दरगाह परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी।
नमाज के लिए स्थान का चयन
इसके बाद समुदाय के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन ने सर्वे नंबर 612 को नमाज के लिए चिन्हित किया।
