मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बाघों की मौतों पर रिपोर्ट मांगी
बाघों की मौतों की जांच के लिए अदालत का आदेश
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में राज्य में बाघों की मौतों के संदर्भ में सभी नौ बाघ अभयारण्यों की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कान्हा बाघ अभयारण्य (केटीआर) में बाघों के बीच संभावित कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी पी शर्मा की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। यह याचिका केटीआर में हाल ही में हुई आठ बाघों की मौत के मामले में दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि केटीआर के आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों में सीडीवी के संक्रमण को देखते हुए लगभग 2,000 श्वानों का टीकाकरण किया गया है। हालांकि, अदालत ने संक्रमण की रोकथाम के लिए अधिक प्रभावी और त्रुटिरहित रणनीति अपनाने पर जोर दिया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार को केटीआर से संबंधित उच्चतम न्यायालय के सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, कान्हा सहित राज्य के सभी बाघ अभयारण्यों में कुत्तों के टीकाकरण और संक्रमण रोकने के उपायों पर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने सभी नौ बाघ अभयारण्यों में वन्यजीव पशु चिकित्सकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने और कुत्तों की जन्म नियंत्रण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने का भी निर्देश दिया है।
यह जनहित याचिका मुंबई के अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती द्वारा दायर की गई है, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह और प्रतीक रूसिया ने पैरवी की। याचिका में बताया गया है कि अप्रैल और मई में आठ बाघों की मौत हुई थी, जिनमें बाघिन टी-122 (सुनैना), बाघिन टी-141 (अमाही), उनके चार किशोर शावक और युवा बाघ टी-220 (महावीर) शामिल हैं। याचिका में इन मौतों के पीछे सीडीवी संक्रमण की आशंका जताते हुए वैज्ञानिक निगरानी, जैव सुरक्षा उपायों और पशु चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की गई है।
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि जनवरी से अब तक राज्य में 40 बाघों की मौत हो चुकी है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष राज्य में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार मध्य प्रदेश में 785 बाघ थे, जो पूरे देश में सबसे अधिक हैं।
