मदरसा शिक्षा पर उपमुख्यमंत्री का विवादास्पद बयान, सपा और जमीयत उलमा-ए-हिंद की प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री का बयान
(फाइल फोटो के साथ) लखनऊ, चार अगस्त: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को एक विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों में “आतंकी जैसी सोच” विकसित होती है। मौर्य ने विधान भवन में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, “मदरसा शिक्षा प्राप्त करने वाले लोग भारत माता की जय नहीं बोलते और न ही वंदे मातरम गाते हैं। उनके मन में आतंकवादी जैसी सोच पनपती है।”
सपा और जमीयत उलमा-ए-हिंद की प्रतिक्रिया
इस बयान पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा आतंकियों को संरक्षण देती है और ये लोग उनके कार्यालयों में पाए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इन आतंकियों को प्रशिक्षण भी देती है। वहीं, मुसलमानों के प्रमुख संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद ने मौर्य के बयान को ‘सांप्रदायिकता की इंतेहा’ बताया। संगठन के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मौर्य के बयान की कड़ी निंदा की और कहा कि जिनके पूर्वजों ने अंग्रेजों से माफी मांगी, वे आज मदरसों पर आतंकवाद का आरोप लगा रहे हैं।
मदनी का बयान
मदनी ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा भड़काऊ बयान न केवल उस पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि यह देश की धार्मिक और शैक्षिक परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और भारतीय संविधान का भी अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा बयान केवल वही व्यक्ति दे सकता है, जो देश के इतिहास और मदरसों की भूमिका से अनजान हो। मदनी ने यह भी बताया कि जिन मदरसों को आज आतंकवाद का अड्डा कहा जा रहा है, उन्हीं से निकले उलमा ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
संविधान की रक्षा का दायित्व
मौलाना मदनी ने कहा कि उपमुख्यमंत्री का पद किसी एक धर्म या वर्ग का नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य के नागरिकों का संवैधानिक पद है। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा की शपथ लेने वाले हर जिम्मेदार व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह समाज में एकता और आपसी सम्मान को बढ़ावा दे, न कि ऐसे बयान दे, जो करोड़ों नागरिकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाएं।
