मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद राहत शिविरों में बढ़ती मौतों की संख्या

मणिपुर में मई 2023 में हुई जातीय हिंसा के बाद राहत शिविरों में 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, चूराचांदपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित है। कांगपोकपी जिले में भी बड़ी संख्या में विस्थापित लोग रह रहे हैं। इसके अलावा, अप्राकृतिक मौतों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें खुदकुशी और ड्रग ओवरडोज शामिल हैं। प्रशासन द्वारा राहत शिविरों में स्वास्थ्य सेवाएं और मानसिक काउंसलिंग प्रदान की जा रही है। जानें इस गंभीर स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
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मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद राहत शिविरों में बढ़ती मौतों की संख्या gyanhigyan

मणिपुर में जातीय हिंसा का दर्दनाक परिणाम

मणिपुर में मई 2023 में हुई जातीय हिंसा का एक गंभीर पहलू सामने आया है। गृह विभाग द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, तब से अब तक राहत शिविरों और अस्थायी आवासों में 700 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है।


आरटीआई से मिली जानकारी

यह जानकारी मणिपुर सूचना आयोग के निर्देश पर शुक्रवार को आरटीआई कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक हरेश्वर गोस्वामी को प्रदान की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य के नौ जिलों के राहत शिविरों में कम से कम 731 विस्थापित लोगों की जान जा चुकी है। चूराचांदपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 248 मौतें हुईं। इसके बाद बिष्णुपुर में 151, कांगपोकपी में 128, इंफाल वेस्ट में 94, काकचिंग में 60 और इंफाल ईस्ट में 25 मौतें दर्ज की गईं। जिरीबाम में 13, थौबल में 11 और तेंगनौपाल में एक व्यक्ति की भी जान गई।


कांगपोकपी जिले की स्थिति

मणिपुर में संघर्ष के तीन साल बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। आरटीआई से पता चला है कि राज्यभर में 43,000 से अधिक लोग आज भी राहत शिविरों और प्री-फैब्रिकेटेड घरों में रह रहे हैं। 30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कांगपोकपी जिले में सबसे ज्यादा 15,694 विस्थापित लोग हैं। इसके अलावा, बिष्णुपुर में 10,092 और चूराचांदपुर में 6,365 लोग अभी भी शिविरों में रह रहे हैं।


अप्राकृतिक मौतों की घटनाएं

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, राहत शिविरों में कम से कम 25 अप्राकृतिक मौतें भी हुई हैं। चूराचांदपुर में ऐसी 6 मौतें हुईं, जिनमें डूबने की चार घटनाएं, करंट लगने का एक मामला और यौन उत्पीड़न का एक मामला शामिल है। इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।


इंफाल वेस्ट में 4 अप्राकृतिक मौतें हुईं, जिनमें फांसी लगाकर खुदकुशी के दो मामले, ड्रग ओवरडोज का एक मामला और गोली लगने से हुई एक मौत शामिल है। इन घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने शिविरों में काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए हैं।


प्रशासन की सहायता

राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को न केवल अपने घरों से दूर रहने का दुख सहना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इंफाल ईस्ट जिले के शिविरों में 217 लोग गंभीर या लाइलाज बीमारियों से पीड़ित हैं। इसी तरह, इंफाल वेस्ट में 41 और बिष्णुपुर में 26 मरीज भी ऐसी ही बीमारियों से जूझ रहे हैं। जिला प्रशासन ने बताया कि बीमार लोगों को चिकित्सा उपचार, मानसिक काउंसलिंग, दवाइयां, व्हीलचेयर और सर्जरी के लिए आर्थिक सहायता जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।