मणिपुर में जातीय संघर्ष के समाधान के लिए मुख्यमंत्री से मिले जोमी संगठन

मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले के जोमी संगठनों ने मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह से मुलाकात की, जिसमें जातीय संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर चर्चा की गई। यह बैठक राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था और समुदायों के बीच संवाद का प्रतीक है। साथ ही, महिला संगठन इमागी मीरा ने विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की, जिसमें राज्य की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की जाएगी। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक और प्रदर्शन के बारे में अधिक जानकारी।
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मुख्यमंत्री से मुलाकात

चूड़ाचांदपुर जिले के तीन प्रमुख जोमी संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह से मिला। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य में जातीय संघर्ष का शांतिपूर्ण, समावेशी और स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार सभी पक्षों के साथ संवाद जारी रखेगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में जोमी काउंसिल, 'यूनिफाइड जोऊ ऑर्गनाइजेशन' (यूजेडओ) और 'जोमी चीफ्स एसोसिएशन' के सदस्य शामिल थे।


बैठक का महत्व

मुख्यमंत्री से यह मुलाकात इंफाल स्थित सचिवालय में हुई। बयान में कहा गया है कि यह बैठक महत्वपूर्ण थी, क्योंकि मई 2023 में राज्य में जातीय हिंसा के बाद पहली बार इन तीनों संगठनों के प्रतिनिधि चूड़ाचांदपुर से एक साथ इंफाल पहुंचे। यह बैठक राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था और समुदायों के बीच धीरे-धीरे बहाल हो रही आवाजाही का प्रतीक है।


जोमी समुदाय की पहचान

जोमी कई जनजातियों का समूह है, जो मुख्य रूप से चूड़ाचांदपुर जिले में निवास करते हैं। उनकी जातीय और भाषाई समानताएं कुकी समुदाय से हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि सरकार शांति को बढ़ावा देने, सभी समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखने और सामान्य जीवन की बहाली के लिए प्रतिबद्ध है।


महिला संगठन का प्रदर्शन

इस बीच, एक महिला संगठन के सदस्यों ने कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को प्रदर्शन किया और मणिपुर विधानसभा का तत्काल सत्र बुलाने की मांग की। इमागी मीरा के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के सामने प्रदर्शन किया। संगठन की अध्यक्ष सुजाता थोखचोम ने कहा, "हम राज्य के कई मुद्दों पर चर्चा के लिए विधानसभा सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं, जिसमें मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति और 'ऑपरेशन निलंबन' पर प्रस्ताव भी शामिल है।"


सदस्यों की एकता की आवश्यकता

सुजाता ने कहा, "सदन के सभी सदस्यों को इस सत्र के लिए एक साथ आना चाहिए, चाहे वे सत्तारूढ़ दल से हों या विपक्ष से।" उन्होंने यह भी कहा कि अब तक राज्य को बचाने के लिए विधानसभा की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है।