मणिपुर में उग्रवादी संगठनों का शिविर स्थानांतरण पर सहमति

मणिपुर में उग्रवादी संगठनों ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से सात शिविरों को स्थानांतरित करने और उनकी संख्या को कम करने पर सहमति जताई है। यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के साथ त्रिपक्षीय बैठक में लिया गया। नए समझौते के तहत, मणिपुर में स्थायी शांति लाने के लिए बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने पर भी सहमति बनी है। जानें इस महत्वपूर्ण समझौते के बारे में और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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मणिपुर में संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से शिविरों का स्थानांतरण

इंफाल, 8 अगस्त - मणिपुर में ‘अभियान निलंबन’ (एसओओ) समझौते के तहत शामिल उग्रवादी समूहों ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से सात नामित शिविरों को स्थानांतरित करने और उनकी कुल संख्या को कम करने पर सहमति व्यक्त की है। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई है।


बयान के अनुसार, यह निर्णय नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) तथा यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) के प्रतिनिधियों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में लिया गया।


बैठक के परिणामस्वरूप एक संशोधित त्रिपक्षीय एसओओ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें नए नियम और शर्तें शामिल हैं, जो हस्ताक्षर के दिन से एक वर्ष तक लागू रहेंगी। यह समझौता केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और केएनओ तथा यूपीएफ जैसे संगठनों के बीच संघर्ष-विराम के लिए किया गया था, जिसे पहली बार 2008 में स्थापित किया गया था।


बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि बैठक में मणिपुर में स्थायी शांति और स्थिरता लाने के लिए बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने पर सहमति बनी। इसमें कहा गया कि केएनओ और यूपीएफ ने संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों से सात शिविरों को स्थानांतरित करने और उनकी संख्या को घटाने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही, हथियारों को पास के सीआरपीएफ/बीएसएफ शिविरों में ले जाने का निर्णय भी लिया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एसओओ में शामिल संगठन पहाड़ी जिलों, विशेषकर चूड़ाचांदपुर और कांगपोकपी में 14 शिविर संचालित कर रहे हैं, जिनमें केएनओ और यूपीएफ के लगभग 2,200 कैडर मौजूद हैं।


ये शिविर निगरानी वाली रिहायशी जगहें हैं, जहां उन उग्रवादी समूहों के सदस्यों को रखा जाता है, जिन्होंने सरकार के साथ एसओओ या शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ये शिविर हथियारबंद गुटों को निर्धारित नियमों के दायरे में सीमित और नियंत्रित रखते हैं।