मणिपुर में उग्रवादियों का हमला, असम राइफल्स के दो जवान शहीद

मणिपुर में सोमवार को संदिग्ध उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर हमला किया, जिसमें दो जवान शहीद हो गए। गृह मंत्री ने इस हमले की निंदा की और सुरक्षा बलों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। यह घटना राज्य में चल रही जातीय हिंसा के बीच हुई है, जिसमें पहले ही कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जानें इस हमले के पीछे की कहानी और मणिपुर की सुरक्षा स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
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मणिपुर में उग्रवादियों का घातक हमला

सोमवार को मणिपुर में संदिग्ध उग्रवादियों ने एक काफिले पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें असम राइफल्स के दो जवान मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह हमला दोपहर करीब 1.30 बजे उखरुल जिले के नुंगशांग खोंग इलाके में हुआ, जब उग्रवादियों ने 40 असम राइफल्स के काफिले पर गोलीबारी की। इलाके में अतिरिक्त बल भेजा गया और हमलावरों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया गया। इस घात लगाकर किए गए हमले की निंदा करते हुए, मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने कहा कि ऐसे हमले हिंसा से प्रभावित राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की चल रही कोशिशों को कमजोर करते हैं। कोंथौजम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उखरुल के नुंगशांग खोंग में 40 असम राइफल्स के काफिले पर हुए दुर्भाग्यपूर्ण हमले से मुझे गहरा दुख हुआ है।


उन्होंने भरोसा जताया कि सुरक्षा बल दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएंगे और यह पक्का करेंगे कि उनसे कानून के मुताबिक सख्ती से निपटा जाए। मई 2023 में मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद से ही सुरक्षा बल मणिपुर के संवेदनशील इलाकों में तलाशी और दबदबा बनाए रखने के अभियान चला रहे हैं। इस संघर्ष में 260 से ज़्यादा लोगों की जान गई है और हज़ारों लोग बेघर हुए हैं। शांति बहाल करने की लगातार कोशिशों के बावजूद, यह राज्य के सामने सुरक्षा से जुड़ी सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बना हुआ है।