भोजशाला परिसर में भक्तों का उत्सव: हाई कोर्ट के फैसले का जश्न

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को 'सरस्वती मंदिर' घोषित किया, जिसके बाद भक्तों ने वहां पूजा-अर्चना का जश्न मनाया। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद, श्रद्धालुओं ने बिना किसी रोक-टोक के मां सरस्वती की विशेष पूजा की। इस फैसले को भोज उत्सव समिति ने ऐतिहासिक करार दिया है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की कहानी और आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं।
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भोजशाला परिसर में भक्तों का उत्सव: हाई कोर्ट के फैसले का जश्न gyanhigyan

भक्तिमय माहौल में मनाया गया जश्न

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को 'सरस्वती मंदिर' के रूप में मान्यता दिए जाने के एक दिन बाद, शनिवार को वहां का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय और भावुक हो गया। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु परिसर में एकत्र हुए और मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना, आरती और भजन-कीर्तन किया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई।


भोजशाला परिसर में भक्तों ने प्रार्थनाओं, भजनों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस ऐतिहासिक फैसले का जश्न मनाया। भोज उत्सव समिति के सदस्य भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।


भक्तों की खुशी और उत्साह

अदालत के निर्णय के बाद भक्तों ने बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना करने की खुशी व्यक्त की। कई भक्तों ने कहा कि उन्होंने इस पल का इंतजार वर्षों से किया था।


एक भक्त ने बताया कि फैसले के बाद लोग भावनाओं से अभिभूत हो गए और नाच-गाकर इसका जश्न मनाया। उन्होंने यह भी कहा कि अब इस स्थल पर प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जा सकेगी।


भोज उत्सव समिति का ऐतिहासिक निर्णय पर स्वागत

भोज उत्सव समिति के सदस्यों ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया और उन सभी का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस स्थल के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। समिति के सदस्य राजेश शुक्ला ने कहा कि इस फैसले से देवी सरस्वती की पूजा बिना किसी बाधा के संभव हो गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देवी की प्रतिमा जल्द ही मंदिर परिसर में वापस लाई जाएगी।


उन्होंने सभी पक्षों से हाई कोर्ट के फैसले का सम्मान करने और शांति बनाए रखने की अपील की।


हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

शुक्रवार को, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 2003 में जारी किए गए आदेश के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया। उस आदेश के तहत मुसलमानों को भोजशाला परिसर में शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी, जबकि हिंदुओं की पूजा पर प्रतिबंध था।


अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस स्थल पर हिंदुओं की पूजा वर्षों से जारी रही है और यह कभी भी पूरी तरह से बंद नहीं हुई। पीठ ने उन ऐतिहासिक अभिलेखों का भी उल्लेख किया, जिनमें भोजशाला को परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा हुआ संस्कृत शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया गया है।


आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी

इस फैसले के बाद, हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उनका ध्यान इस स्थल पर पूजा-अर्चना शुरू करने पर केंद्रित है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में संभावित कार्यवाही के लिए तैयारियां की जा रही हैं।


हाई कोर्ट ने देवी सरस्वती की मूर्ति की वापसी की पुरानी मांग का भी उल्लेख किया, जो वर्तमान में लंदन के एक म्यूज़ियम में रखी है। बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार मूर्ति की वापसी के संबंध में पहले से जमा किए गए आवेदनों पर विचार कर सकती है।