भीलवाड़ा में बीमा धोखाधड़ी का मामला: बीमार व्यक्ति की हत्या का खुलासा
भीलवाड़ा में बीमा धोखाधड़ी का मामला
भीलवाड़ा. भीलवाड़ा में एक व्यक्ति की संदिग्ध मौत को बिजली के हादसे के रूप में पेश कर बीमा क्लेम हड़पने की एक चौंकाने वाली साजिश का खुलासा हुआ है। मृतक के बेटे ने पुलिस को बताया कि उसके पिता का भारी बीमा करवाया गया और फिर उन्हें राजस्थान लाकर हत्या कर दी गई। डॉक्टर की सूझबूझ से यह मामला साधारण करंट हादसे के बजाय हत्या के रूप में सामने आया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और गुजरात तक इसकी कड़ियों का पता लगा रही है.
सूत्रों के अनुसार, अहमदाबाद के 36 वर्षीय दीपक भाई लंबे समय से बीमार थे। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनकी बीमारी का फायदा उठाया। 7 मई को उन्हें इलाज के बहाने भीलवाड़ा लाया गया, जहां उनकी रात में मौत हो गई। आरोपियों ने इसे एक साधारण हादसा दिखाने की कोशिश की और शव के साथ छेड़छाड़ की ताकि बीमा क्लेम आसानी से प्राप्त किया जा सके.
बेटे का बड़ा खुलासा
मृतक के बेटे देवांश ने पुलिस को बताया कि सूरज, विशाल और अर्जुन नाम के लोग पहले लोगों का बड़ा बीमा करवाते थे और फिर उन्हें गुजरात से राजस्थान लाकर हत्या कर देते थे। देवांश के अनुसार, उसके पिता को भी करंट दिया गया था और शव को इस तरह से तैयार किया गया कि यह बिजली के हादसे जैसा लगे. आरोपी शव को अस्पताल छोड़कर भाग गए, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने इस मामले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
डॉक्टर को हुआ शक
मांडल अस्पताल में नाइट ड्यूटी पर तैनात सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहित सेहरावत ने बताया कि रात में एक व्यक्ति को मृत अवस्था में लाया गया था। परिजनों ने दावा किया कि खेत में करंट लगने से मौत हुई है, लेकिन जांच में कई बातें संदिग्ध लगीं। हाथ और पैरों पर जलने के निशान थे और शरीर पर धुएं जैसा कालापन था। सीने पर ईसीजी इलेक्ट्रोड के निशान भी मिले। पूछताछ में परिजन संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद डॉक्टर ने तुरंत पुलिस को सूचित किया.
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवाया और सुबह पोस्टमार्टम कराया। आवश्यक सैंपल जांच के लिए भेजे गए। पुलिस ने विश्वास सूरज सैमुअल, भीखा भाई और डालू गाडरी को गंगरार टोल नाके से हिरासत में लिया। गांधीनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की एक टीम गुजरात भी भेजी गई है, क्योंकि आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से इसी तरह बीमा क्लेम के लिए लोगों को निशाना बना रहा था.
परिवार पर दुखों का पहाड़
दीपक भाई पहले से बीमारी से जूझ रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार होगा, लेकिन घर लौटने से पहले ही उनकी मौत की खबर आई। मां चंपाबेन बेटे की मौत से टूट चुकी हैं, जबकि छोटा बेटा देवांश अब बिना पिता के जिंदगी बिताने को मजबूर है। इस पूरे मामले ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है.
गिरोह का modus operandi
पुलिस जांच में पता चला है कि यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर, बीमार और शराब के आदी लोगों को निशाना बनाता था। उनके नाम पर भारी बीमा पॉलिसी करवाई जाती थी। इसके बाद इलाज के बहाने राजस्थान लाकर शराब के नशे में रखा जाता और फिर हत्या कर शव को करंट हादसे जैसा दिखाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है.
