भारतीय सेना ने ड्रोन ऑपरेटर्स की एक लाख की टीम बनाई

भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटर्स की एक टीम बनाई है। इस टीम में नई स्पेशल फोर्स 'भैरव' शामिल है, जो अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इन ऑपरेटर्स को दुश्मन के ठिकानों को सटीकता से टारगेट करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। जानें इस नई रणनीति के पीछे का उद्देश्य और इसके महत्व के बारे में।
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भारतीय सेना ने ड्रोन ऑपरेटर्स की एक लाख की टीम बनाई

आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना

भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध के बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सेना ने अपने बेड़े में एक लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटर्स की एक विशाल टीम तैयार की है। इस विशेष दस्ते में सेना की नई स्पेशल फोर्स 'भैरव' भी शामिल है, जो अत्याधुनिक तकनीक और घातक मारक क्षमता से लैस है।


दुश्मन की गतिविधियों पर नजर

इन एक लाख से अधिक जवानों को न केवल ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी गई है, बल्कि उन्हें वास्तविक युद्ध की परिस्थितियों में दुश्मन के ठिकानों, उनकी गतिविधियों और फॉर्मेशन्स को सटीकता से टारगेट करने की भी कड़ी शिक्षा दी गई है। यह कदम आज के 'हाइब्रिड' युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जहां तकनीक और इंटेलिजेंस जीत के लिए महत्वपूर्ण हैं।



नई 'भैरव' स्पेशल फोर्स का परिचय

भैरव बटालियन, जो सेना के पुनर्गठन के तहत बनाई गई है, इस आधुनिक बदलाव का प्रतीक है। ये यूनिट्स पारंपरिक युद्ध शैली से हटकर नई सोच और ऑपरेशनल जरूरतों के अनुसार तैयार की गई हैं।


भैरव बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर ने इस मिशन की महत्वता को बताते हुए कहा, 'आज के समय में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। चुनौतियां अब हाइब्रिड हो चुकी हैं। इनसे निपटने के लिए हमें आधुनिक तकनीक से पूरी तरह लैस होना होगा। भैरव बटालियन को इसी नई सोच और भविष्य की युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखकर स्थापित किया गया है।'