भारतीय सेना का स्पष्टीकरण: पूर्व सैनिकों द्वारा भ्रामक बयानबाजी का प्रयास

भारतीय सेना ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस वीडियो पर स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पूर्व सैनिकों द्वारा भ्रामक बयानों के माध्यम से सेना की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। सेना ने स्पष्ट किया है कि चारों व्यक्तियों को अनुशासनहीनता के कारण बर्खास्त किया गया था और वे अब झूठी जानकारी फैला रहे हैं। यह स्पष्टीकरण आम आदमी पार्टी के सांसदों द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया है, जिसमें इन पूर्व सैनिकों ने भाग लिया।
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भारतीय सेना का स्पष्टीकरण: पूर्व सैनिकों द्वारा भ्रामक बयानबाजी का प्रयास gyanhigyan

भारतीय सेना का आधिकारिक बयान

भारतीय सेना ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो पर स्पष्टीकरण जारी किया है, जो मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। इस वीडियो में आरोप लगाया गया है कि सेना की छवि को जानबूझकर खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वीडियो में दिखने वाले चार व्यक्तियों - चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव, पी नरेंद्र और शंकर सिंह गुर्जर - को अनुशासनहीनता के कारण सेवा से बर्खास्त किया गया था। शंकर सिंह गुर्जर, जो नवंबर 2024 से भगोड़ा है, के खिलाफ सैन्य और नागरिक अदालतों में कार्यवाही चल रही है।


भ्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस का संदर्भ

एक्स पर साझा किए गए बयान में कहा गया है कि यह स्पष्टीकरण संजय सिंह और मनोज झा द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में है, जिसमें इन चार पूर्व सैनिकों को मंच पर बुलाया गया था। सेना ने स्पष्ट किया कि चंदू चव्हाण को अनुशासनहीनता के लिए 25 जुलाई 2024 को बर्खास्त किया गया था, जबकि हरेंद्र यादव को 27 जनवरी 2024 को सेवा से निकाला गया। पी नरेंद्र भी अनुशासनहीनता के कारण बर्खास्त हुए।


सेना की छवि को धूमिल करने का प्रयास

सेना ने आगे कहा कि ये व्यक्ति अब झूठी जानकारी फैला रहे हैं और सशस्त्र बलों में फूट डालने का प्रयास कर रहे हैं। यह पूरी कवायद उनके अनुशासनहीन आचरण और उनके खिलाफ चल रही कार्यवाहियों से ध्यान भटकाने के लिए की जा रही है। बयान में यह भी कहा गया है कि इन व्यक्तियों की बर्खास्तगी को गलत तरीके से उत्पीड़न के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।


सांसदों की प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रभाव

यह स्पष्टीकरण आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और आरजेडी सांसद मनोज झा द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया, जिसमें चारों पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। सेना ने आरोप लगाया कि ये चारों व्यक्ति सेवा शर्तों के बारे में झूठ फैला रहे हैं और अधिकारी-सैनिकों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।


सोशल मीडिया पर चेतावनी