भारतीय रुपये में तेजी: RBI के नए कदमों का प्रभाव

भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को लेकर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिसके चलते रुपये में उल्लेखनीय तेजी आई है। 2 अप्रैल को रुपये ने डॉलर के मुकाबले 12 वर्षों में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की। RBI के नए नियमों के कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आई है, जिससे रुपये की स्थिति में सुधार हुआ है। जानें इस तेजी के पीछे के कारण और वैश्विक बाजार पर इसके प्रभाव के बारे में।
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भारतीय रुपये में तेजी: RBI के नए कदमों का प्रभाव

भारतीय रुपये में उछाल

भारतीय रुपये में तेजी: RBI के नए कदमों का प्रभाव

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिसके परिणामस्वरूप रुपये में गिरावट रुकने के साथ-साथ एक उल्लेखनीय उछाल भी देखने को मिला है। RBI ने करेंसी में अस्थिरता को कम करने के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा की, जिसके बाद यह तेजी आई है।

2 अप्रैल को, डॉलर के मुकाबले रुपये में 12 वर्षों में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बैंक अपने ऑफशोर लॉन्ग डॉलर पोजीशन को कम करने में लगे रहे। करेंसी मार्केट खुलने के बाद, रुपये ने डॉलर के मुकाबले 1.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 93.17 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद का उच्चतम स्तर है।

क्यों आई इतनी बड़ी तेजी?
1 अप्रैल को, RBI ने फॉरेक्स मार्केट के नियमों को सख्त किया। आरबीआई ने बैंकों को रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट ग्राहकों को रुपये के नॉन-डिलीवर फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट जारी करने से रोक दिया। यह कॉन्ट्रैक्ट भविष्य में रुपये के मूल्य का अनुमान लगाने की अनुमति देता है। इस रोक के कारण RBI ने यह सुनिश्चित किया है कि कंपनियां रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को फिर से बुक नहीं कर सकतीं।

रुपये में गिरावट के कई कारण
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली रुपये में गिरावट का एक प्रमुख कारण रही है। मार्च में, इन निवेशकों ने 1.11 लाख करोड़ रुपये की बिक्री की। इसके अलावा, युद्ध के कारण वैश्विक महंगाई का खतरा बढ़ गया है। होमुर्ज के रास्ते बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है।

हालांकि, RBI द्वारा बैंकों के शुद्ध खुले पदों के जोखिम को सीमित करने के प्रयासों के बावजूद, 30 मार्च को करेंसी ने 95 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया। ट्रंप के ईरान युद्ध पर दिए गए बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।

कच्चे तेल के भाव में उछाल
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान युद्ध के लक्ष्यों को लगभग पूरा कर लिया है। अगले 2 से 3 हफ्तों में एक बड़ा कदम उठाने की योजना है, लेकिन उन्होंने युद्ध समाप्त करने की कोई समयसीमा नहीं बताई, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और यह 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया।