ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बदलते बयानों ने बाजार में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर दी है। उनके इशारों पर बाजार में गिरावट आई है और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। सोने और चांदी की बिक्री ने निवेशकों की पूंजी को प्रभावित किया है। 2 अप्रैल को ट्रंप ने संकेत दिया कि वह युद्ध जारी रखेंगे और नए टैरिफ का ऐलान किया। इस डर का असर बाजार पर स्पष्ट रूप से देखा गया, जिससे भारतीय शेयर बाजार में 1500 अंकों की गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि सोने की कीमत 4000 रुपये और चांदी की कीमत 13000 रुपये तक गिर गई।
हालांकि, इस गिरावट के बीच भारतीय रुपये ने अप्रत्याशित तेजी दिखाई। 2 अप्रैल को भारतीय रुपये ने 12 साल में सबसे बड़ी तेजी दर्ज की, 2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.94 रुपये पर पहुंच गया। पिछले दिनों की गिरावट के बाद रुपये ने शानदार रिकवरी की है। केवल रुपये ही नहीं, बल्कि बाजार ने भी रिकवरी की है। जो बाजार 1500 अंकों की गिरावट के साथ खुला था, उसने अब सुधार किया है। इस सुधार के पीछे रिजर्व बैंक का महत्वपूर्ण निर्णय रहा है।
रुपये में तेजी का कारण क्या है?
युद्ध के चलते रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रही थी। लेकिन गुरुवार को रुपये ने 130 पैसे की मजबूती दिखाई और 93.53 के स्तर पर खुला। एक दिन में रुपये में 163 पैसे की वृद्धि हुई, जो पिछले 12 वर्षों में सबसे बड़ी है। 30 मार्च को रुपये की कीमत 95 रुपये तक पहुंच गई थी। रुपये को स्थिर करने के लिए रिजर्व बैंक ने दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पहला, नेट ओपन पोजीशन (NOP) और दूसरा, नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF)।
रिजर्व बैंक ने रुपये को गिरने से कैसे रोका?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को रुपये से जुड़े डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स (NDF) की पेशकश करने से रोक दिया है। पहले, आरबीआई ने बैंकों के नेट ओपन पोजीशन की सीमा को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया था। आरबीआई के इस निर्णय के बाद, बैंकों को 10 अप्रैल तक इस सीमा के भीतर डॉलर होल्ड करना होगा। इस निर्णय ने लगभग 30 से 40 बिलियन डॉलर की पोजीशन को कम कर दिया है। बैंकों के पास डॉलर की पोजीशन कम होने से उसकी मांग में कमी आएगी। आरबीआई के निर्णय के तुरंत बाद, बैंकों ने डॉलर बेचकर रुपये में परिवर्तित करना शुरू कर दिया। डॉलर की मांग में कमी से रुपये की वैल्यू बढ़ेगी और रुपये मजबूत होगा।
रुपये की गिरावट रोकने के लिए आरबीआई का मास्टरस्ट्रोक
भारतीय रुपये को मजबूत करने के लिए रिजर्व बैंक ने बैंकों और अधिकृत डीलर्स पर नई पाबंदियां लगाई हैं। रिजर्व बैंक ने बैंकों को नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स की पेशकश करने से रोक दिया है। नए और रद्द किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स को फिर से बुक करने से भी रोका गया है। ‘नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स’ का मतलब है वह बाजार, जहां बिना रुपये की असली डिलीवरी के ट्रेडिंग होती थी। आरबीआई के निर्णय के बाद अब ट्रेडर्स अपनी पोजीशन खत्म कर रहे हैं। इससे बाजार में डॉलर का इन्फ्लो बढ़ गया है। पैनिक सेलिंग ने रुपये को मजबूती प्रदान की है।
एनडीएफ क्या है?
NDF एक प्रकार की करेंसी ट्रेडिंग है, जिसमें डॉलर और रुपये के बीच स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग होती है। इसमें रुपये और डॉलर का एक्सचेंज नहीं होता है, बल्कि दोनों करेंसी के बीच मूल्य अंतर पर सेटल होता है.
