भारतीय रुपया: गिरावट रोकने के लिए RBI के चार महत्वपूर्ण कदम

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरावट का सामना कर रहा है, जिसके रोकथाम के लिए आरबीआई ने चार महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन उपायों का उद्देश्य रुपये की स्थिति को मजबूत करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। जानें इन कदमों के बारे में और निवेश की संभावनाओं के बारे में।
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रुपये की गिरावट और RBI के प्रयास

नई दिल्ली: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट का सामना कर रहा है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन नीतिगत उपायों को रुपये के प्रति बाजार की धारणा को बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य रुपये की गिरावट की चिंताओं को समाप्त करना और देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाना है।


रुपये की वर्तमान स्थिति

भारतीय रुपया: गिरावट रोकने के लिए RBI के चार महत्वपूर्ण कदम


शुक्रवार को रुपये की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.18 पर बंद हुई थी, जबकि हाल ही में यह 97 के करीब पहुंच गया था। वर्ष 2026 में अब तक डॉलर की कीमत में 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। कई प्रमुख कंपनियों को उम्मीद है कि सरकार के उठाए गए कदमों के कारण देश में 75 अरब डॉलर तक का निवेश आ सकता है, जो रुपये की गिरावट को रोकने में मददगार साबित होगा।


निवेश की संभावनाएं

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, भारत में कम से कम 40 अरब डॉलर का निवेश आने की संभावना है, जिससे रुपये की स्थिति 92-93 के स्तर पर पहुंच सकती है। वहीं, कोटक सिक्योरिटीज का मानना है कि यह निवेश 50 से 75 अरब डॉलर तक भी हो सकता है।


आरबीआई के चार प्रमुख कदम

रुपये को मजबूत करने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आरबीआई ने निम्नलिखित चार कदम उठाए हैं:


1. सरकारी बॉंड में छूट: फुली एक्सेसिबल रूट का दायरा बढ़ाकर 15, 30 और 40 साल के सरकारी बॉंड शामिल किए गए हैं। शॉर्टमैच्योरिटी कैप को हटाने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी।


2. अनिवासी भारतीयों को राहत: एनआरआई और ओसीआई के लिए इक्विटी निवेश के नियमों को सरल बनाया गया है।


3. डॉलर जमा पर सब्सिडी: विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा पर हेजिंग लागत का पूरा खर्च आरबीआई 30 सितंबर 2026 तक उठाएगा, जिससे बैंक ग्राहकों को 5.5% से अधिक ब्याज मिल सकेगा।


4. निर्यातकों पर सख्ती: निर्यात से होने वाली कमाई को भारत में लाने की समयसीमा को 15 महीने से घटाकर 9 महीने कर दिया गया है।


क्या रुपये की कीमत 100 तक पहुंचेगी?

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि रुपये की चाल मौजूदा आर्थिक स्थितियों से भिन्न हो सकती है। इसलिए रुपये के 100 के स्तर तक पहुंचने की आशंकाएं पूरी तरह से निराधार हैं।