भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत और समुद्री सुरक्षा में योगदान

2025 में, भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ताकत के रूप में अपनी पहचान को मजबूत किया। ऑपरेशन सिंदूर और अन्य अभियानों के माध्यम से, नौसेना ने न केवल अवैध तस्करी को रोकने में मदद की, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दिया। इस वर्ष के दौरान, कई महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास और स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में प्रगति हुई है। जानें कैसे भारतीय नौसेना ने अपनी बहुआयामी भूमिका निभाई और भविष्य में क्या चुनौतियाँ और अवसर सामने हैं।
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भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत और समुद्री सुरक्षा में योगदान

भारतीय नौसेना की नई पहचान

2025 में, भारतीय नौसेना ने केवल समुद्रों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहकर, भारत की वैश्विक समुद्री ताकत के रूप में एक मजबूत पहचान बनाई। ऑपरेशन सिंदूर और विमानवाहक पोतों की प्रभावशाली तैनाती ने दुनिया का ध्यान भारत की सामरिक क्षमताओं की ओर आकर्षित किया। इसके साथ ही, नौसेना ने समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्वदेशी जहाज निर्माण के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को भी बढ़ावा दिया।


महत्वपूर्ण अभियान और समुद्री सुरक्षा

31 मार्च 2025 को, एक महत्वपूर्ण अभियान के तहत, फ्रिगेट आईएनएस तारकश ने पी-8आई समुद्री गश्ती विमान की सहायता से पश्चिमी हिंद महासागर में एक संदिग्ध नाव को रोका। तलाशी दल ने लगभग 2,500 किलोग्राम नशीले पदार्थ, जैसे हशीश और हेरोइन, जब्त किए। यह कार्रवाई अवैध तस्करी को रोकने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


नौसेना के निरंतर प्रयास

पूरे वर्ष, नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प के तहत व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की, समुद्री डाकुओं के खिलाफ गश्त की और बचाव कार्य किए। ये प्रयास भारत के व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिनसे देश के अधिकांश ऊर्जा आयात और निर्यात होते हैं।


अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सैन्य अभ्यास

इस वर्ष, अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। TROPEX-25, एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास, ने हिंद महासागर में युद्ध कौशल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद बहुपक्षीय और द्विपक्षीय अभ्यास हुए, जिनमें KONKAN-25 भी शामिल है, जिसमें INS विक्रांत ने ब्रिटेन के HMS प्रिंस ऑफ वेल्स विमानवाहक पोत समूह के साथ मिलकर काम किया।


स्वदेशीकरण की दिशा में प्रगति

आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशीकरण की दिशा में उठाए गए कदम एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहे हैं। INS तमाल रूस से कमीशन किया गया अंतिम विदेशी निर्मित युद्धपोत था, जबकि 2025 में घरेलू स्तर पर निर्मित जहाजों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई।


भविष्य की चुनौतियाँ और अवसर

भारतीय नौसेना की बहुआयामी भूमिका भारत की आर्थिक सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को सीधे तौर पर समर्थन देती है। भविष्य में, फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान-26 जैसी घटनाएं भारत को एक सहयोगी समुद्री नेता के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगी।