भारतीय जूनियर हॉकी टीम के नए कोच बने फ्रेडरिक सोयेज

हॉकी इंडिया ने भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के नए हेड कोच के रूप में फ्रेडरिक सोयेज की नियुक्ति की है। सोयेज, जो यूरोपीय हॉकी के प्रमुख कोचों में से एक माने जाते हैं, के पास 15 वर्षों का कोचिंग अनुभव है। उन्होंने पहले फ्रांस और स्पेन की टीमों के लिए कोचिंग की है। दिलीप टिर्की ने सोयेज की नियुक्ति पर खुशी व्यक्त की और कहा कि उनका अनुभव भारतीय हॉकी के लिए फायदेमंद होगा। टीम 2036 ओलंपिक खेलों की तैयारी कर रही है, जिसमें सोयेज की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
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हॉकी इंडिया ने नए हेड कोच की घोषणा की

हॉकी इंडिया ने 14 मई को भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के नए हेड कोच की नियुक्ति की घोषणा की। इस बार फ्रांस के पूर्व खिलाड़ी फ्रेडरिक सोयेज को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो पहले दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पीआर श्रीजेश की जगह लेंगे। श्रीजेश का कार्यकाल लगभग डेढ़ साल तक चला, जिसमें उनका अनुबंध पिछले साल चेन्नई और मदुरै में आयोजित जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप के बाद समाप्त हो गया था। इस प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता था। हॉकी इंडिया ने श्रीजेश के अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाया, हालांकि उन्होंने फिर से हेड कोच बनने के लिए आवेदन किया था, लेकिन इस बार उन्हें यह अवसर नहीं मिला।


फ्रेडरिक सोयेज का परिचय

फ्रेडरिक सोयेज को यूरोपीय हॉकी के प्रमुख कोचों में से एक माना जाता है, जिनके पास कोचिंग का 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने 1995 से 2010 तक फ्रांस के लिए 196 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 195 गोल किए। अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने के बाद, सोयेज ने कोचिंग में कदम रखा और फ्रांस तथा स्पेन की टीमों के लिए काम किया। स्पेन के कोच रहते हुए, उनकी टीम ने 2019 में यूरोपीय चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। सोयेज ने 2016, 2020 और 2024 के ओलंपिक खेलों के साथ-साथ 2018 और 2023 के हॉकी वर्ल्ड कप में भी कोच की भूमिका निभाई है।


2036 ओलंपिक की तैयारी

फ्रेडरिक सोयेज की नियुक्ति पर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व भारतीय खिलाड़ी दिलीप टिर्की ने खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सोयेज के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव है, जो भारतीय हॉकी के लिए फायदेमंद होगा। हम 2036 के ओलंपिक खेलों को ध्यान में रखते हुए एक बड़े विजन के तहत तैयारी कर रहे हैं, जिसमें सोयेज की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हमारा लक्ष्य केवल वर्तमान परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा खिलाड़ी पूल तैयार करना है जो जूनियर और सीनियर स्तर पर समान रूप से प्रतिस्पर्धा कर सके।