भारतीय कंपनियों का अमेरिका में बड़ा निवेश: 20.5 अरब डॉलर का ऐलान
अमेरिका में भारतीय कंपनियों का निवेश
SelectUSA Investment Summit 2026 के दौरान, भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की योजना का खुलासा किया है, जिससे वॉशिंगटन में हलचल मच गई है। एक ही दिन में 12 भारतीय कंपनियों ने 1.1 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की।
यह निवेश उस समय सामने आया है जब हाल के महीनों में भारत और भारतीयों के प्रति अमेरिकी राजनीतिक विमर्श में नकारात्मक टिप्पणियां की गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादास्पद बयानों के बावजूद, अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब भारतीय पूंजी पर भरोसा कर रही है। यह निवेश भारत की आर्थिक शक्ति को दर्शाता है, जिसमें टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में विस्तार शामिल है। इससे हजारों अमेरिकी नौकरियों का सृजन होने की संभावना है।
भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि भारत-अमेरिका आर्थिक संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं। यह स्थिति एक बड़े राजनीतिक विरोधाभास को भी उजागर करती है। अमेरिका में भारतीय प्रवासियों और वीजा संबंधी सख्ती के बावजूद, भारतीय कंपनियों के निवेश का स्वागत किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की बदलती वैश्विक आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। भारत अब केवल विदेशी निवेश आकर्षित करने वाला देश नहीं है, बल्कि वह अब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने वाला एक प्रमुख खिलाड़ी बन चुका है। भारतीय कंपनियों ने पिछले डेढ़ दशक में अमेरिका में आईटी, स्टील, ऑटो, फार्मा और होटल क्षेत्रों में अरबों डॉलर का निवेश किया है।
Tata Consultancy Services अमेरिका में सबसे बड़े विदेशी आईटी नियोक्ताओं में से एक है, जिसने कई राज्यों में टेक सेंटर और इनोवेशन हब स्थापित किए हैं। Infosys ने भी हजारों स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती की है और कई टेक्नोलॉजी कैंपस खोले हैं। स्टील क्षेत्र में Essar Group और JSW Steel ने अमेरिकी उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण निवेश किया है।
भारतीय कंपनियों की भूमिका
फार्मा क्षेत्र में, भारतीय कंपनियां अमेरिका की जेनेरिक दवा सप्लाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। Sun Pharmaceutical Industries, Dr. Reddys Laboratories और Cipla जैसी कंपनियां अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पहले भारतीय कंपनियों को अमेरिका में केवल आउटसोर्सिंग और बैक ऑफिस सेवाओं के लिए देखा जाता था, लेकिन अब वे वहां फैक्ट्रियां स्थापित कर रही हैं, रिसर्च सेंटर खोल रही हैं और स्थानीय सप्लाई चेन को नियंत्रित कर रही हैं।
इस प्रकार, भारत अब केवल कार्यबल का आपूर्तिकर्ता नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण पूंजी निर्यातक भी बन चुका है।
