भारत सरकार की नई परियोजना से रामरेखा घाट का पर्यटन विकास

भारत सरकार ने रामरेखा घाट के पर्यटन विकास के लिए एक नई परियोजना की शुरुआत की है, जो सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने का कार्य करेगी। इस परियोजना का कार्यान्वयन बेसिल द्वारा किया जा रहा है, जो बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करने में मदद करेगा। इस पहल में कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जो इस परियोजना के महत्व को दर्शाती है।
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भारत सरकार की नई परियोजना से रामरेखा घाट का पर्यटन विकास gyanhigyan

परियोजना का उद्देश्य और महत्व

यह परियोजना भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा अनुमोदित 'सेंट्रल एजेंसियों के लिए पर्यटन अवसंरचना विकास सहायता' योजना के तहत बनाई गई है। इसका कार्यान्वयन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन मिनी रत्न सीपीएसई बेसिल द्वारा किया जा रहा है।


सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

बेसिल की यह पहल आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक प्रदर्शनों का समन्वय करते हुए रामरेखा घाट की समृद्ध विरासत और आध्यात्मिक महत्व को उजागर करती है। यह परियोजना क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों के अनुभव को समृद्ध बनाने का कार्य करती है। यह बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने और विश्वस्तरीय अवसंरचना के माध्यम से पर्यटन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


बेसिल के अध्यक्ष का बयान

इस परियोजना के बारे में बात करते हुए, बेसिल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर डी.के. मुरली (सेवानिवृत्त) ने कहा, “यह परियोजना भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति बेसिल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। रामरेखा घाट पर यह पहल न केवल पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करेगी, बल्कि बिहार की कालजयी विरासत को आधुनिक और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करने में भी मदद करेगी।”


उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन / डेयरी विकास विभाग के मंत्री नंद किशोर राम, बिहार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, बक्सर विधायक आनंद मिश्रा, जिलाधिकारी साहिला (आईएएस) और बेसिल के उप-महाप्रबंधक बिपिन बी. पांडेय भी उपस्थित थे।