भारत में स्वास्थ्य संकट: मोटापा और कुपोषण की दोहरी चुनौती
भारत में स्वास्थ्य संकट की गंभीरता
नई दिल्ली: भारत वर्तमान में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। देश में पोषण से जुड़ी दो विपरीत समस्याएं एक साथ उभर रही हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के हालिया आंकड़े बताते हैं कि एक ओर जहां कुछ लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक बड़ा हिस्सा कुपोषण का सामना कर रहा है। लगातार बिगड़ती जीवनशैली और पोषण की कमी ने देश में 'डबल हेल्थ इमरजेंसी' जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है।
1. मोटापे की समस्या: शहरी क्षेत्रों में गंभीर स्थिति
सर्वेक्षण के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की आयु के लोग तेजी से मोटापे का शिकार हो रहे हैं। NFHS5 के आंकड़ों की तुलना में इस बार मोटापे की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है:
- महिलाएं: 30.7% महिलाएं अब अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में हैं।
- पुरुष: 27.3% पुरुष भी इस समस्या से प्रभावित हैं।
शहरी क्षेत्रों की स्थिति: शहरों में यह समस्या और भी गंभीर है। लगभग 43% महिलाएं और 36.3% पुरुष मोटापे या अधिक वजन की श्रेणी में आ चुके हैं।
मोटापे के मामले में सबसे अधिक वृद्धि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में देखी गई है।
2. कुपोषण की समस्या: खत्म नहीं हो रहा दंश
जहां एक ओर लोग मोटापे से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर कुपोषण की समस्या बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, देश का लगभग हर पांचवां वयस्क कम वजन की श्रेणी में आता है।
- पुरुषों में कम वजन की दर: 16.2% से बढ़कर 19.7% हो गई है।
- महिलाओं में कम वजन की दर: 18.7% से बढ़कर 19.7% तक पहुंच गई है।
बिहार, झारखंड, राजस्थान, असम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कुपोषण की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो पोषण संबंधी असमानता को दर्शाती है।
3. डायबिटीज का खतरा: हर 5वां पुरुष प्रभावित
NFHS6 के आंकड़ों ने देश में डायबिटीज के बढ़ते खतरे की ओर इशारा किया है। 15 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी में ब्लड शुगर का स्तर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है।
