भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि: क्या है इसके पीछे का कारण?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में तीन रुपये की वृद्धि की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और घटते घरेलू भंडार के कारण हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से ईंधन की बचत करने की अपील की है। इस वृद्धि ने आम जनता और उद्योग जगत में चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस ने इस पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है, यह कहते हुए कि इससे महंगाई बढ़ेगी। जानें इस मुद्दे के सभी पहलुओं के बारे में।
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का ऐलान

वह दिन आखिरकार आ गया है, जिसका देशवासियों को लंबे समय से इंतजार था। पश्चिम एशिया में संकट के चलते कई देशों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है, लेकिन मोदी सरकार ने इस दौरान एक भी रुपया नहीं बढ़ाया। हालाँकि, अब भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये की वृद्धि की गई है। यह ध्यान देने योग्य है कि भारत शायद एकमात्र ऐसा देश है जहाँ अप्रैल 2022 से इनकी कीमतें स्थिर थीं। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी।


अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव

हाल की वृद्धि का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और घटते घरेलू भंडार हैं। फरवरी से अब तक भारत का तेल भंडार लगभग 15 प्रतिशत घटकर 91 मिलियन बैरल तक पहुँच गया है, जिससे सरकार और तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।


प्रधानमंत्री की अपील

इस स्थिति को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन की बचत करने की अपील की है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग, कार पूलिंग, और ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा देने की सलाह दी है। इसके अलावा, उन्होंने गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद से बचने का आग्रह किया है।


उद्योग की चिंताएँ

तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 16 से 17 रुपये की वृद्धि की मांग की थी, लेकिन केवल तीन रुपये की वृद्धि की गई है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में और वृद्धि होगी। घरेलू रसोई गैस की कीमतें भी मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाई गई थीं।


महंगाई की चिंता

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि इसका मुख्य कारण है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता को बढ़ा दिया है।


आर्थिक प्रभाव

भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। सरकारी तेल कंपनियाँ पिछले कई महीनों से कीमतों में वृद्धि का बोझ सहन कर रही थीं, लेकिन अब उन्हें कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।


कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब मोदी सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय उन्हें लूटा।