भारत में नकली चांदी की बढ़ती समस्या: जानें कैसे करें पहचान

भारत में चांदी की कीमतों में वृद्धि के साथ नकली चांदी की समस्या भी बढ़ रही है। कई उत्पाद मानकों पर खरे नहीं उतरते, जिससे ग्राहकों को नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि BIS द्वारा हॉलमार्किंग अनिवार्य करने के बावजूद, कई ज्वेलर्स इसका पालन नहीं कर रहे हैं। रिफाइनरी कंपनियों ने लाइसेंसिंग सिस्टम की मांग की है, जिससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ सके। जानें कैसे पहचानें असली चांदी और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
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चांदी की कीमतों में वृद्धि और नकली उत्पादों का संकट

भारत में चांदी की कीमतों में लगातार वृद्धि के साथ-साथ निवेश की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इस स्थिति में नकली और निम्न गुणवत्ता वाली चांदी एक गंभीर समस्या बन गई है। बाजार में बिकने वाले कई चांदी के बार, सिक्के और आभूषण शुद्धता के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। इससे न केवल ग्राहकों को नुकसान हो रहा है, बल्कि चांदी के पूरे बाजार की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।


भारत में नकली चांदी की बढ़ती समस्या: जानें कैसे करें पहचान


हाल के समय में चांदी की कीमतों में तेजी आई है, जिससे निवेशक इसे सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं। इस कारण चांदी के बार, सिक्के और बर्तनों की मांग में वृद्धि हुई है। लेकिन, इस बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी और नकली उत्पाद बनाने वाले लोग बाजार में कम शुद्धता वाली चांदी बेच रहे हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में बड़ी मात्रा में ऐसी चांदी मौजूद है, जो 999 प्योरिटी के मानक को पूरा नहीं करती। कई मामलों में चांदी में निकेल, कैडमियम और लेड जैसे हानिकारक तत्व भी पाए जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं। यह चिंता का विषय है कि ये धातुएं अक्सर स्क्रैप सिल्वर से बनी ज्वेलरी और अन्य वस्तुओं में मिल रही हैं।


भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सितंबर 2025 से चांदी की हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अभी भी कई ज्वेलर्स इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे ग्राहकों के लिए असली और नकली चांदी की पहचान करना कठिन हो रहा है।


विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी के लिए भी सोने की तरह सख्त हॉलमार्किंग और लाइसेंसिंग सिस्टम की आवश्यकता है। वर्तमान में भारत में सालाना लगभग 7,000 टन चांदी की खपत होती है, जबकि इसके लिए केवल 286 अस्सेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर हैं। इसके विपरीत, सोने के लिए 1,500 से अधिक सेंटर हैं। यह असंतुलन चांदी के बाजार में एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।


जयपुर, आगरा, राजकोट, कोल्हापुर, सलेम और कटक जैसे शहर चांदी के आभूषण और धार्मिक वस्तुओं के निर्माण के प्रमुख केंद्र हैं। यहां बड़ी मात्रा में चांदी से बने बर्तन, पूजा सामग्री और सिक्के तैयार होते हैं। लेकिन, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से कई उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली चांदी की गुणवत्ता संदिग्ध होती है।


रिफाइनरी कंपनियां सरकार से मांग कर रही हैं कि चांदी रिफाइन करने वाली यूनिट्स के लिए भी लाइसेंसिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाए। उनका कहना है कि इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को शुद्ध चांदी मिल सकेगी।


इस बीच, BSE और NSE अपने कमोडिटी प्लेटफॉर्म पर क्वॉलिटी सर्टिफाइड सिल्वर बार लाने की योजना बना रहे हैं। इससे निवेशकों को प्रमाणित और भरोसेमंद चांदी खरीदने का विकल्प मिल सकता है।


विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार और BIS ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो नकली और घटिया चांदी का कारोबार और बढ़ सकता है। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल BIS हॉलमार्क वाली चांदी ही खरीदें और निवेश से पहले उसकी शुद्धता की जांच अवश्य करें।