भारत में नए राजमार्ग और औद्योगिक पार्कों के विकास की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश में एक नए चार लेन वाले राजमार्ग के निर्माण और 100 औद्योगिक पार्कों के विकास को मंजूरी दी गई। इस परियोजना से लाखों रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे और भारत-नेपाल व्यापार में सुधार होगा। जानें इस महत्वाकांक्षी योजना के बारे में और कैसे यह देश की औद्योगिक अवसंरचना को मजबूत करेगी।
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भारत में नए राजमार्ग और औद्योगिक पार्कों के विकास की मंजूरी

कैबिनेट बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से बहराइच तक चार लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के निर्माण को हरी झंडी दी गई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह 101.515 किलोमीटर लंबा राजमार्ग हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत 6969.04 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा।


रोजगार के अवसरों का सृजन

यह परियोजना रोजगार के अवसर पैदा करेगी


इस परियोजना में लगभग 3,485.49 करोड़ रुपये की सिविल लागत और भूमि अधिग्रहण के लिए अतिरिक्त 1,574.85 करोड़ रुपये शामिल हैं।


इससे 36.54 लाख प्रत्यक्ष और 43.04 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।


बाराबंकी-बहराइच खंड के उन्नयन से इन जिलों के शहरी क्षेत्रों में मौजूद ज्यामितीय खामियों, तीखे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्याओं का समाधान होगा।


परियोजना के पूरा होने पर, यह नेपालगंज सीमा के माध्यम से भारत और नेपाल के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार और पारगमन गलियारा स्थापित करेगी, जिससे रूपाईडीहा लैंड पोर्ट तक पहुंच में सुधार होगा।


33,660 करोड़ रुपये की औद्योगिक विकास योजना

33,660 करोड़ रुपये की भव्य योजना


सरकार ने देशभर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए 33,660 करोड़ रुपये की भारत औद्योगिक विकास योजना को मंजूरी दी है।


वैष्णव ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य विश्वस्तरीय औद्योगिक अवसंरचना का विकास करना, विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देना और भारत के विकास को गति देना है।


प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई, जिससे लगभग 15 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।


इस योजना के तहत, 100 से 1,000 एकड़ तक के औद्योगिक पार्कों को प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता के साथ विकसित किया जाएगा।