भारत में थोक महंगाई दर में अप्रत्याशित वृद्धि, अप्रैल में 8.3% तक पहुंची
महंगाई दर में तेजी का कारण
मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, भारत की थोक महंगाई दर अप्रैल में 8.3% तक पहुंच गई, जो कि इस श्रृंखला में सबसे अधिक है। इसका मुख्य कारण ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि है, जिसका प्रभाव समग्र अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। यह महंगाई दर 42 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। मार्च में यह दर 3.88% थी, जो अब तेजी से बढ़ी है।
महंगाई के आंकड़े
थोक मूल्य सूचकांक के अनुसार, महंगाई दर मार्च के 3.88% से बढ़कर अप्रैल में 8.3% हो गई। इसका मुख्य कारण मिनरल ऑयल, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, धातु और निर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि है। ये आंकड़े रिटेल और थोक महंगाई के बीच बढ़ते अंतर को दर्शाते हैं। उत्पादकों की लागत तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि वैश्विक वस्तुओं और ऊर्जा की ऊंची कीमतें घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रही हैं।
सरकार की नीतियों का प्रभाव
यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब सरकार ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस के दामों में ज्यादा बदलाव नहीं किया है। इससे आम जनता पर ईंधन की महंगाई का सीधा असर फिलहाल नहीं पड़ा है। हालांकि, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
फ्यूल और पावर की कीमतों में वृद्धि
अप्रैल में फ्यूल और पावर श्रेणी में ऊर्जा से जुड़े उत्पादों की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई। एलपीजी की महंगाई दर मार्च में 1.54% की गिरावट से बढ़कर अप्रैल में 10.92% पर पहुंच गई। पेट्रोल की महंगाई दर 2.50% से बढ़कर 32.40% हो गई। हाईस्पीड डीजल की महंगाई भी मार्च के 3.26% से बढ़कर अप्रैल में 25.19% हो गई।
रिटेल महंगाई में वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में देश में रिटेल महंगाई 3.48% पर पहुंच गई है, जबकि मार्च में यह 3.40% थी। अक्टूबर 2025 में रिटेल महंगाई 0.25% पर थी, उसके बाद से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। नवंबर में यह 0.71%, दिसंबर में 1.33%, जनवरी में 2.74% और फरवरी में 3.21% पर पहुंच गई।
