भारत में तरबूज उत्पादन: उत्तर प्रदेश की प्रमुखता और वैश्विक मांग
भारत में तरबूज की खेती का महत्व
वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के अनुसार, भारत तरबूज उत्पादन में विश्व में तीसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश इस फल की खेती में सबसे आगे है, जहां देश के कुल उत्पादन का 21 प्रतिशत हिस्सा आता है। चीन हर साल 60,386,121 मीट्रिक टन तरबूज उगाता है, जबकि तुर्किए दूसरे स्थान पर है। भारत में हर साल 3,308,000 मीट्रिक टन तरबूज की पैदावार होती है.
तरबूज की बढ़ती मांग
तरबूज, जो अब केवल एक फल नहीं रह गया है, बल्कि विभिन्न खाद्य प्रयोगों का आधार बन चुका है। इसे स्मूदी, मॉकटेल, शरबत, मिठाइयों और कैंडी में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। भारतीय तरबूज की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है, विशेषकर संयुक्त अरब अमीरात, मालदीव, कतर, भूटान और बहरीन जैसे देशों में.
उत्तर प्रदेश: तरबूज का गढ़
उत्तर प्रदेश तरबूज उत्पादन में सबसे आगे है, जिसमें 21 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके बाद कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र का स्थान है। इन राज्यों की जलवायु और मिट्टी तरबूज की खेती के लिए अनुकूल हैं.
उत्तर प्रदेश की मिट्टी और जलवायु
उत्तर प्रदेश की बलुई मिट्टी और जल निकासी की क्षमता इसे तरबूज की खेती के लिए आदर्श बनाती है। गंगा और यमुना नदियों के किनारे की भूमि, विशेषकर आगरा, मथुरा, इटावा, प्रयागराज, वाराणसी और मिर्जापुर में, हर साल बंपर पैदावार देती है.
तरबूज की विशेषताएं
उत्तर प्रदेश का तरबूज मीठा और रसीला होता है। इसकी बुआई फरवरी के अंत में शुरू होती है और मई-जून तक फसल तैयार हो जाती है। गर्मी के मौसम में इसकी मांग अधिक होती है, जिससे इसकी बिक्री में तेजी आती है.
वैश्विक स्तर पर भारतीय तरबूज की मांग
भारतीय तरबूज का सबसे बड़ा खरीदार संयुक्त अरब अमीरात है, इसके अलावा मालदीव, भूटान, कतर, बहरीन और नेपाल भी प्रमुख ग्राहक हैं। तरबूज का इतिहास 5000 साल पुराना है, और इसे प्राचीन मिस्र में भी उगाया जाता था.
