भारत में जनगणना के लिए महापंजीयक की अपील: डेटा गोपनीयता की गारंटी

भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण ने जनगणना के दौरान डेटा गोपनीयता की गारंटी दी है। उन्होंने लोगों से सही जानकारी देने की अपील की और बताया कि स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू की गई है। जानें इस प्रक्रिया के बारे में और कैसे यह डेटा संग्रहण को आसान बनाएगी।
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भारत में जनगणना के लिए महापंजीयक की अपील: डेटा गोपनीयता की गारंटी

जनगणना के दौरान डेटा की गोपनीयता

भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने आज जनगणना कार्यकर्ताओं को सही जानकारी देने के लिए लोगों से अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग किसी भी साक्ष्य या सरकारी योजना के लाभ के लिए नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत सभी व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखा जाता है। दिल्ली सहित कुछ राज्यों में अप्रैल में 16वीं जनगणना का पहला चरण शुरू होने से पहले संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि दिल्ली में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी।




महापंजीयक ने कहा, “जनगणना के दौरान एकत्रित सभी व्यक्तिगत डेटा गोपनीय रहेगा। इसे सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत साझा नहीं किया जा सकता, न ही इसे अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि सांख्यिकीय डेटा का उपयोग केवल संकलन के लिए किया जाएगा। जाति से संबंधित डेटा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह डेटा दूसरे चरण में एकत्र किया जाएगा और इसके प्रश्नों को व्यापक चर्चा के बाद तय किया जाएगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता के कारण इसके दुरुपयोग की आशंका निराधार है।


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मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि पहली बार स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें लोग जनगणना के पहले चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना) से पहले 15 दिनों में डिजिटल रूप से अपनी जानकारी जमा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “पहले डेटा कागज पर एकत्र किया जाता था, जिससे डिजिटलीकरण में समय लगता था। अब हम शुरुआत से ही डिजिटल डेटा प्राप्त करेंगे, जिससे हम जल्दी डेटा जारी कर सकेंगे। कई डेटा सेट 2027 में प्रकाशित होंगे।” यह सुविधा केवल देश में निवास करने वाले लोगों के लिए उपलब्ध होगी, विदेश में रहने वालों के लिए नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी।




आयुक्त ने यह भी बताया कि डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र किया जाएगा, और एक वेब पोर्टल जनगणना और हाउस लिस्टिंग की गतिविधियों की निगरानी करेगा। डेटा की सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डेटा सेंटरों को ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के अद्यतन को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसका चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई संबंध नहीं है।