भारत में एलपीजी संकट: उद्योग और उपभोक्ताओं पर बढ़ता दबाव

पश्चिम एशिया में तनाव के चलते भारत में एलपीजी संकट गहरा गया है, जिससे आम नागरिकों और उद्योगों पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार ने अनावश्यक बुकिंग को रोकने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन गैस की कमी से होटल, रेस्तरां और निर्माण क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। कई उपभोक्ता अब लकड़ी या अन्य अस्थायी ईंधन का सहारा ले रहे हैं। जानें इस संकट के पीछे के कारण और सरकार की नई नीतियों के बारे में।
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भारत में एलपीजी संकट: उद्योग और उपभोक्ताओं पर बढ़ता दबाव

भारत में एलपीजी संकट की स्थिति

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच, भारत में एलपीजी की कमी ने आम नागरिकों और उद्योगों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हालांकि, सरकार द्वारा की गई बुकिंग पर नियंत्रण की कोशिशों का असर अब दिखने लगा है, लेकिन गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं.


बुकिंग में कमी और ऑनलाइन बुकिंग में वृद्धि

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में एलपीजी सिलिंडर की बुकिंग में कमी आई है। शुक्रवार को घरेलू एलपीजी की बुकिंग लगभग 88.8 लाख थी, जबकि शनिवार को यह घटकर 77 लाख रह गई। सरकार का कहना है कि अनावश्यक बुकिंग को रोकने की अपील का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.


सरकार की नई नीतियाँ

एलपीजी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए, सरकार ने उन उपभोक्ताओं पर सख्ती की है जिनके पास पाइप गैस और एलपीजी दोनों कनेक्शन हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है। यह निर्णय आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लागू किया गया है.


ई-केवाईसी की अनिवार्यता

सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित जैविक सत्यापन यानी ई-केवाईसी भी अनिवार्य कर दिया गया है। उपभोक्ता अपने तेल विपणन कंपनी के मोबाइल एप और आधार एप के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.


व्यवसायों पर संकट का प्रभाव

एलपीजी संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, रेस्तरां और उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति को घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया है, जिससे कई शहरों में होटल और रेस्तरां को संचालन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.


विभिन्न शहरों में स्थिति

विजयवाड़ा में गैस की कमी के कारण होटल और छोटे भोजनालयों ने खाने की कीमतें बढ़ा दी हैं। बेंगलुरु में होटल उद्योग को भी बड़ा झटका लगा है, जहां कारोबार में 25 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आई है.


मजदूरों की स्थिति

पटना में काम करने वाले मजदूरों के लिए यह संकट और भी गंभीर हो गया है। कई मजदूर अब लकड़ी या अन्य अस्थायी ईंधन का सहारा लेकर खाना बना रहे हैं.


उद्योगों पर असर

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद ने तमिलनाडु सरकार से मांग की है कि वस्त्र निर्यात उद्योग को भी व्यावसायिक गैस आवंटन में शामिल किया जाए, क्योंकि गैस की कमी से उत्पादन प्रक्रिया बाधित हो रही है.


पश्चिम एशिया में तनाव का प्रभाव

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि, एक भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर ने सुरक्षित रूप से कच्चा तेल लेकर भारत के लिए प्रस्थान किया है.


सरकार की स्थिति

मोदी सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश में गैस की नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं.