भारत में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों पर सरकार की कार्रवाई
केंद्र सरकार की मेटा को तलब करने की योजना
भारत में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के आरोपों के चलते, केंद्र सरकार ने मेटा के अधिकारियों को बुलाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों को इस मामले में मेटा से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया है। MeitY इस मुद्दे पर कंपनी से जवाब तलब करेगा।
यह कदम BBC Eye की एक जांच के बाद उठाया गया है, जिसमें यह पाया गया कि इंस्टाग्राम पर "रेप वीडियो" और "चाइल्ड वीडियो" जैसे शब्दों वाले विज्ञापन चलाए जा रहे थे। ये विज्ञापन उपयोगकर्ताओं को Telegram चैनलों पर भेजते थे, जहां कथित तौर पर अवैध सामग्री बेची जा रही थी।
बीबीसी की जांच के निष्कर्ष
बीबीसी की जांच में यह सामने आया कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन दिखाए गए, जो उपयोगकर्ताओं को Telegram चैनलों पर भेजते थे, जहां बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री केवल 99 रुपये में उपलब्ध थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इंस्टाग्राम पर विज्ञापन तभी प्रकाशित होते हैं जब वे प्लेटफॉर्म की मॉडरेशन प्रक्रिया से गुजरते हैं।
जांच में एक विज्ञापन में एक लड़का और एक लड़की, जो लगभग 12 वर्ष के लग रहे थे, को सेक्सुअल एक्टिविटी में शामिल दिखाया गया। एक अन्य विज्ञापन में एक 52 वर्षीय व्यक्ति और एक 12 वर्षीय लड़की को दिखाया गया, जिसमें उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम पर और वीडियो देखने के लिए क्लिक करने के लिए कहा गया।
मेटा की प्रतिक्रिया
बीबीसी द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में, मेटा ने कहा कि उसने पहले ही कई विज्ञापनों को हटा दिया था और उन्हें पोस्ट करने वाले खातों को निलंबित कर दिया था। कंपनी ने यह भी बताया कि उसने और विज्ञापनों को हटाया और उन खातों को बंद किया, जो उसकी नीतियों का उल्लंघन कर रहे थे।
मेटा ने स्वीकार किया कि "कोई भी प्रणाली पूर्ण नहीं होती" और कहा कि उसकी समीक्षा प्रक्रिया हर नीति उल्लंघन का पता नहीं लगा सकती। कंपनी ने यह भी बताया कि विज्ञापन लाइव होने के बाद भी वह प्रोएक्टिव डिटेक्शन तकनीक का उपयोग करती है और उपयोगकर्ताओं को नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट की रिपोर्ट करने की सुविधा देती है।
