भारत में E100 एथेनॉल फ्यूल स्टेशनों की स्थापना की योजना
E100 एथेनॉल के लिए केंद्र सरकार की नई पहल
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से, भारत सरकार अब 100% एथेनॉल, जिसे E100 फ्लेक्स फ्यूल कहा जाता है, को तेजी से अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अगले दो वर्षों में, सरकार देशभर में 5,000 E100 फ्यूल स्टेशनों की स्थापना की योजना बना रही है। इससे फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का उपयोग बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा की बचत में सहायता मिलेगी।
शुरुआत बड़े शहरों से
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, अगले महीने दिल्ली, मुंबई, पुणे और नागपुर में 150 E100 फ्यूल स्टेशनों का उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद, अगले 6 से 12 महीनों में दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पहले चरण में 500 रिटेल आउटलेट्स की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है, जिसे अगले 24 महीनों में 5,000 तक बढ़ाने की योजना है।
ऑटो कंपनियों की तैयारी
भारत की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों जैसे Maruti Suzuki, Hyundai, Tata Motors, Mahindra & Mahindra, Hero MotoCorp और TVS Motor Company ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के प्रोटोटाइप तैयार कर लिए हैं। हालांकि, E100 पंपों की कमी और ईंधन की कीमतों के बारे में स्पष्टता न होने के कारण ये कंपनियां अभी तक इन वाहनों को बाजार में पेश नहीं कर पाई हैं।
कच्चे तेल के आयात में कमी की संभावना
फ्लेक्स फ्यूल वाहन ऐसे इंजन पर चलते हैं जो पेट्रोल और अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन दोनों का उपयोग कर सकते हैं। इससे भारत को कच्चे तेल के आयात पर होने वाले भारी खर्च में राहत मिल सकती है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 10.9 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल आयात किया था।
बढ़ती मांग की चुनौती
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगभग 400 पंपों पर E100 उपलब्ध कराया था, लेकिन इसकी मांग बहुत कम रही। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बड़ी संख्या में फ्लेक्स फ्यूल वाहन सड़कों पर नहीं आते, तब तक E100 की मांग बढ़ाना एक चुनौती बना रहेगा। वर्तमान में भारत में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण किया जा रहा है, लेकिन सरकार इसे अगले स्तर पर ले जाने की योजना बना रही है।
