भारत-पाकिस्तान संबंधों का इतिहास: आतंकवाद से लेकर वार्ता तक
इस लेख में भारत और पाकिस्तान के बीच के जटिल संबंधों का इतिहास प्रस्तुत किया गया है। आगरा शिखर वार्ता से लेकर 2001 में संसद पर हमले और 2008 में मुंबई आतंकवादी हमले तक, यह लेख उन घटनाओं का विश्लेषण करता है जिन्होंने दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाया। जानें कैसे इन घटनाओं ने द्विपक्षीय वार्ताओं को प्रभावित किया और आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को आकार दिया।
Aug 30, 2025, 19:57 IST
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आगरा शिखर वार्ता और उसके परिणाम
आगरा शिखर वार्ता जुलाई 2001 में आयोजित की गई थी, लेकिन यह अनिर्णित रही। इस वार्ता के विफल होने के बाद, भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंधों में तनाव बढ़ गया। भारतीय संसद पर हमले के बाद, यह तनाव और भी बढ़ गया।
13 दिसंबर 2001 की घटना
13 दिसंबर 2001 की सुबह
13 दिसंबर 2001 की सुबह एक सामान्य दिन की तरह थी। दिल्ली में ठंड का मौसम शुरू हो चुका था। सुबह के लगभग 11:28 बजे, संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था। विपक्ष के हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नेता विपक्ष सोनिया गांधी सदन से निकल चुके थे, जबकि गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और लगभग 200 सांसद लोकसभा में मौजूद थे। जैश ए मोहम्मद के हमले में आठ सुरक्षाकर्मी और एक संसद कर्मचारी की जान गई।
मुशर्रफ और वाजपेयी के बीच वार्ता
मुशर्रफ और वाजपेयी के बीच बात
2002 में, पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने 9/11 के हमलों के बाद आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का वचन दिया। 2003 में, उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए युद्धविराम का आह्वान किया। 2004 में, मुशर्रफ ने भारतीय प्रधानमंत्री वाजपेयी के साथ बातचीत की, लेकिन 2007 में पानीपत के पास एक ट्रेन पर बम विस्फोट हुआ, जिसमें 68 लोग मारे गए। 2008 में, भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार संबंधों में सुधार हुआ।
मुंबई आतंकवादी हमले की बरसी
पाक प्रायोजित मुंबई टेरर अटैक
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को हिला दिया। लश्कर-ए-तयैबा के दस आतंकियों ने समुद्री रास्ते से आकर मुंबई में बम धमाके और गोलीबारी की। इस हमले में 160 से अधिक लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए। यह घटना आज भी लोगों के दिलों में ताजा है। लगभग 60 घंटे तक चले ऑपरेशन में 9 आतंकवादियों को मार गिराया गया, जबकि एक आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया, जिसे 21 नवंबर 2012 को फांसी दी गई।