भारत-पाकिस्तान संबंध: इतिहास और वर्तमान तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंधों का इतिहास जटिल और विवादास्पद रहा है। 1947 में विभाजन के बाद से, दोनों देशों के बीच कई संघर्ष हुए हैं, विशेषकर जम्मू-कश्मीर को लेकर। इस लेख में, हम इन संबंधों की जड़ों, विभाजन के प्रभावों और हाल के तनावों पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे ये घटनाएं आज भी दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बनी हुई हैं।
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भारत-पाकिस्तान संबंध: इतिहास और वर्तमान तनाव

पड़ोसी देशों के रिश्ते

यह अक्सर कहा जाता है कि अच्छे पड़ोसी होने पर हमारी कई चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। यह सिद्धांत देशों के संबंधों पर भी लागू होता है। यदि पड़ोसी के घर में आग लग जाए, तो इसे नजरअंदाज करने से उसकी लपटें हमारे घरों तक भी पहुंच सकती हैं। आज हम एक ऐसे पड़ोसी देश के बारे में चर्चा करेंगे, जिसके बारे में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मई 2003 में कहा था कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं। हालांकि, पाकिस्तान एक ऐसा पड़ोसी है जिसे बदलने की इच्छा हर किसी की होती है। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं। पाकिस्तान ने भारत में आतंकवाद का निर्यात किया है, जबकि भारत से खाद्य उत्पाद, औषधियां और औद्योगिक कच्चे माल का आयात करता है। हाल के समय में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने 40 पर्यटकों को घेरकर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई। भारत ने इस पर कड़ा जवाब दिया है, यह दर्शाते हुए कि अब कोई भी इस स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं कर सकता।


भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का इतिहास

भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संकट की जड़ें उनके गठन के समय से जुड़ी हैं। आज हम दक्षिण एशिया के इन दो पड़ोसी देशों के बीच तनाव की पूरी कहानी को क्रमबद्ध तरीके से समझेंगे।


1940-50 का दशक

1940-50 का दशक

भारतीय उपमहाद्वीप 1858 से 1947 तक ब्रिटिश उपनिवेश रहा। जब ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ, तो उपमहाद्वीप दो देशों में विभाजित हो गया। स्वतंत्रता का दिन भारत के लिए जश्न का अवसर था, लेकिन इसके साथ ही विभाजन की त्रासदी भी थी। 15 अगस्त 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप भारत और पाकिस्तान का निर्माण हुआ। विभाजन के दौरान लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए और सांप्रदायिक हिंसा में लाखों लोग मारे गए। इस विभाजन ने सीमा विवाद और अलगाववादी आंदोलनों को जन्म दिया।


आजादी के बाद पाकिस्तान का आक्रमण

आजादी के बाद ही पाक ने किया हमला

स्वतंत्रता के तुरंत बाद, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण करने की योजना बनाई। 21 अक्टूबर 1947 को, पाकिस्तानी सेना द्वारा समर्थित आदिवासियों ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की। इस हमले में हजारों लोग मारे गए और क्षेत्र में आतंक का माहौल बना। भारतीय राजा ने पाकिस्तान के कबायलियों को खदेड़ने के लिए भारत से सहायता मांगी, जिसके बाद भारतीय सेना ने तेजी से कार्रवाई की।


कश्मीर का विभाजन

दो हिस्सों में बंट गया भारत का कश्मीर

1947 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के बाद कश्मीर दो हिस्सों में विभाजित हो गया। पाक अधिकृत कश्मीर वह क्षेत्र है, जिस पर पाकिस्तान ने 1947 में अधिकार कर लिया था। यह क्षेत्र भारतीय कश्मीर का लगभग तीन गुना है और इसकी आबादी लगभग 40 लाख है।